पटना हाईकोर्ट के फैसले से बीपीएससी को लगा बड़ा झटका, उम्मीदवारी निरस्त करने के फैसले को किया रद्द

पटना हाईकोर्ट के फैसले से बीपीएससी को लगा बड़ा झटका, उम्मीदवारी निरस्त करने के फैसले को किया रद्द

Desk. पटना हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न विभागों में असिस्टेंट इंजीनियर (सिविल इंजीनियरिंग) के पद पर नियुक्ति को लेकर बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा अर्हता प्राप्त उम्मीदवारों की उम्मीदवारी को रद्द किये जाने के मामले पर सुनवाई की. अनामिका आशना और अन्य की  याचिकाओं पर जस्टिस चक्रधारी एस सिंह ने सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि इनकी उम्मीदवारी इस आधार पर रद्द नहीं की जा सकती है कि ये यूनिवर्सिटी द्वारा जारी सर्टीफिकेट प्रस्तुत नहीं कर सके.

कोर्ट ने  कहा कि जैसा कि साक्षात्कार पत्र में कहा गया है कि साक्षात्कार के बाद भी यह निर्णय लेने  का अधिकार  आयोग के पास सुरक्षित है कि कोई उम्मीदवार अपेक्षित शैक्षणिक योग्यता रखता है या नहीं, ऐसी स्थिति में आयोग यह  निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगा कि याचिकाकर्ता बी-टेक (सिविल इंजीनियरिंग) की योग्यता आवेदन की अंतिम तिथि को रखते हैं या नहीं. 

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने  कोर्ट को बताया कि आयोग द्वारा 2017  में जारी विज्ञापन में याचिकाकर्ताओं से इस पद पर बहाली के लिए  आवेदन  आमंत्रित किया था. तीनों उम्मीदवारों ने पीटी और मेंस की लिखित परीक्षा को पास करने के बाद साक्षात्कार में भाग लिया. लेकिन  बाद में आयोग ने यह कहते हुए इनकी उम्मीदवारी को रद्द कर दिया कि बी- टेक का प्रोविजनल सर्टिफिकेट बी-आईटी सिंदरी द्वारा जारी किया गया है , न कि विनोबा भावे यूनिवर्सिटी द्वारा.

आयोग ने साक्षात्कार में सफल उम्मीदवारों की भी उम्मीदवारी को रद्द कर दिया. याचिकाकर्ता का कहना था कि यह भी आश्चर्य की बात है कि विनोबा भावे विश्विद्यालय से पास बहुत से अन्य उम्मीदवार, जो कि सिर्फ प्रोविजनल सर्टिफिकेट प्रस्तुत किये थे, उन्हें इस विज्ञापन संख्या - 02/ 2017 में सफल घोषित किया गया था.

हालांकि जब याचिकाकर्ता ने इस बात को अपने रिट याचिका में इस बात की जानकारी दी,  तो बीपीएससी ने उन सभी सफल उम्मीदवारों की भी उम्मीदवारी रद्द कर दी थी. हाईकोर्ट ने सभी पक्षों के दलीले सुनने के बाद  ऐसे सभी उम्मीदवारों के संदर्भ में बीपीएससी द्वारा उम्मीदवारी निरस्त करने के निर्णय को रद्द कर दिया.

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