जिस नेता को दिल्ली वाले ‘टिकट’ से करवाया था बेदखल, उसी नेता की गाड़ी में जा बैठे पुरानी पार्टी के वरिष्ठ नेता, अहसास हुआ तो फिर.....

जिस नेता को दिल्ली वाले ‘टिकट’ से करवाया था बेदखल, उसी नेता की गाड़ी में जा बैठे पुरानी पार्टी के वरिष्ठ नेता, अहसास हुआ तो फिर.....

पटना :  बिहार के एक वरिष्ठ नेता पटना में एकजुटता प्रदर्शित करने करने वाले एक कार्यक्रम में गए थे. उस कार्यक्रम में आगामी आंदोलन की रूपरेखा को लेकर नए-पुराने कई दलों के नेता इकट्ठे हुए. नेताओं ने आगामी आंदोलन का ऐलान कर दिया,फिर कुछ ही मिनटों के बाद वहां से सभी रवाना होने लगे. कुछ-एक नेता आगे निकल भी गए,लेकिन दो-तीन नेताओं को मीडिया वालों ने घेर लिया.

मीडिया से बातचीत कर एक बड़े नेताजी तेजी से निकलने लगे. कार्यक्रम स्थल से निकलने के बाद सामने सड़क पर उनकी गाड़ी जैसी ही सेम मॉडल और सेम कलर की दूसरी गाड़ी लगी थी. वे बड़ी तेजी से निकले और उस गाड़ी का दरवाजा खोल कर बैठने लगे. तभी अचानक उनकी नजर गाड़ी के आगे लगी झंडे पर पड़ी. इसके बाद उनको समझ में आ गया कि वे तो दूसरे नेता की गाड़ी में बैठ रहे हैं. फौरन वे उस गाड़ी को छोड़ कर आगे लगी गाड़ी की ओर निकले. तभी किसी शख्स ने कहा-आप लोग इनको(नेता जी) दूसरे की गाड़ी में बैठा दीजिएगा, इस पर उनके समर्थकों ने कहा-कोई बात नहीं यह भी अपने लोगों की ही गाड़ी है. 

दरअसल पुरानी पार्टी के कद्दावर नेता उस शख्स की गाड़ी में बैठने लगे थे जिससे कुछ समय पहले छत्तीस का रिश्ता हो गया था. आखिर हो भी क्यों नहीं..पुरानी पार्टी वाले नेता जी ने नए वाले नेता जी की कई महीनों की मेहनत पर पानी जो फेर दिया था...खैर....माननीय उस गाड़ी से उतर कर फौरन अपनी गाड़ी में बैठ कर रवाना हो गए.

इलाके से बेदखल करने वाले नेताजी की गाड़ी में जा बैठे माननीय
 
आपको बता दें कि पुरानी पार्टी वाले नेता जी उस शख्स की गाड़ी में बैठने लगे थे जो लोकसभा चुनाव से पहले संसद जाने का सपना संजोए थे. टिकट बंटवारे से पहले ही वे करीब तीन महीनों तक इलाके में खूब पसीना बहाया था. लेकिन ऐन वक्त पर उन्हें मुंह की खानी पड़ी थी. बड़े वाले नेता जी भी समझ गए कि वे उसी व्यक्ति की गाड़ी में बैठ रहे थे जिसको एतिहासिक माने जाने वाले पुराने इलाके से बेदखल किया था.

विवेकानंद की रिपोर्ट

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