भ्रष्ट ड्रग इंस्पेक्टर के आतंक का अंत ! पैसों के लिए गुंडों जैसा करता था बर्ताव, बिहार फार्मेसी कौंसिल में जमकर की थी उगाही

भ्रष्ट ड्रग इंस्पेक्टर के आतंक का अंत ! पैसों के लिए गुंडों जैसा करता था बर्ताव, बिहार फार्मेसी कौंसिल में जमकर की थी उगाही

PATNA: सीतामढ़ी के ड्रग इंस्पेक्टर नवीन कुमार न सिर्फ भ्रष्ट था बल्कि गुंडों जैसा व्यवहार भी करता था। सेटिंग भी काफी तगड़ी थी। सीतामढ़ी में ड्रग इंस्पेक्टर से पहले वह बिहार फार्मेसी कौंसिल में था. निगरानी ब्यूरो ने आज भ्रष्ट ड्रग इंस्पेक्टर को दो लाख रू लेते गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद अब उसके ठिकानों की तलाशी ली जा रही है। 

आतंक का अंत !

बताया जाता है कि फार्मेसी कौंसिल में भी करोड़ों की उगाही की थी. जानकार बताते हैं कि रिश्वत के पैसे से इसने अकूत संपत्ति अर्जित की है। बतौर ड्रग इंस्पेक्टर इसने सीतामढ़ी में आतंक मचा रखा था. वह अपने आप को ड्रग इंस्पेक्टर नहीं सिर्फ इंस्पेक्टर बताता था। बताया जाता है कि आमलोगों और दवा दुकानदारों पर वर्चस्व दिखाने के लिए दिखावा भी खूब करता था. पैंट खाकी रंग का पहनता था और रूल रखे रहता था। दवा कारोबारियों से जबरन पैसे की वसूली करता था। गिरफ्तारी से पहले रिश्वत का दो लाख रू जबरन ले रहा था। उसकी आवाज भी रिकार्ड हुई थी जिसमें वो कह रहा था कि कुछ भी कर लो, दो लाख रू तो देना ही पड़ेगा. जब तक दो लाख रू नहीं देगा काम नहीं होगा। निगरानी ब्यूरो भ्रष्ट ड्रग इंस्पेक्टर के पीछे लगी और सीतामढ़ी आवास से ही दो लाख रू रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। 

रिश्वतखोर को जेल 

बताया जाता है कि ड्रग इंस्पेक्टर के द्वारा दो मेडिकल दुकानदारों से लाइसेंस का रिन्यूल करने के नाम पर रिश्वत की मांग कर रहा था। जानकारी के अनुसार दुकानदार विनोद कुमार सिंह से 75 हजार रुपये तथा मुकेश कुमार से दो लाख की मांग की गई थी। गिरफ्तारी के बाद ड्रग इंस्पेक्टर के तीन ठिकानों सीतामढ़ी समेत पटना व देवघर में छापेमारी चल रही है। निगरानी डीएसपी ने बताया है कि ड्रग इंस्पेक्टर के ठिकानों से मिले रुपये की गिनती चल रही है। ड्रग इंस्पेक्टर का आवास सीतामढ़ी में पासवान चौक पर है। वहीं पटना के शेखपुरा स्थित आवास पर भी निगरानी ब्यूरो सर्च कर रही है। रेड में और क्या-क्या मिला है इसकी जानकारी अभई नहीं लग सकी है। 



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