खुशखबरी ! महंगा नहीं सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल, आम लोगों को मिलेगा चार राज्यों में भाजपा को मिली बड़ी जीत का बड़ा फायदा

खुशखबरी ! महंगा नहीं सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल, आम लोगों को मिलेगा चार राज्यों में भाजपा को मिली बड़ी जीत का बड़ा फायदा

DESK. रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत में जोरदार इजाफा होगा. लेकिन, उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों के चुनाव में भाजपा को मिली बड़ी जीत के बाद अब पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने के बदले भाव में कमी होने की संभावना है. बाजार विश्लेषकों और राजनीतिक जानकरों की मानें तो आने वाले दिनों में केंद्र सरकार आम लोगों को महंगाई की मार से बचाने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत स्थिर या कम कर सकती है. 

अब तक माना जा रहा था कि देश में 10 मार्च को जब पांच राज्यों में चुनावी परिणाम आएगा तब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में जोरदार उछाल आ सकता है. लेकिन दुनिया के बाजार में देखे जा रहे बड़े बदलाव के कारण अब कीमत बढ़ने की संभावना कम लग रही है. दरअसल, रूस- यूक्रेन युद्ध के कारण चढ़ा क्रूड आयल की कीमतें चढ़ी थी. युद्ध शुरू होने के दिन कच्चे तेल की कीमत 88 डॉलर थी जो अगले एक सप्ताह में बढ़कर 139 डॉलर तक पहुंच गया था.

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 139 डॉलर पहुँचने पर यह वर्ष 2008 के बाद सबसे ज्यादा कीमत रही. लेकिन दुनिया के बाजार में 139 डॉलर की कीमत सिर्फ एक दिन रही. युद्ध के बीच बदली परिस्थितियों के कारण क्रूड के दाम नीचे गिर हैं. रविवार को क्रूड ऑयल की कीमत 109 डॉलर प्रति बैरल रही. अगर यही स्थिति रही तो बाजार जानकारों का कहना है कि क्रूड की कमीत आने वाले दिनों में 90 डॉलर प्रति बैरल आ जाएगी. इससे भारत जैसे देश को बड़ा फायदा होगा. उस स्थिति में देश में तेल की कीमतों में 2 से 5 रुपए तक की कमी आ सकती है. 

हालांकि राहत की बात यह है कि रूस- यूक्रेन युद्ध के बाद भी क्रूड की कीमतों में आ रही कमी के कारण भारत में तेल कम्पनियों ने कीमतों को स्थिर रखा है. चुनाव परिणाम आ जाने के बाद भी अब तक किसी प्रकार की जोरदार वृद्धि नहीं हुई है. ऐसे में होली तक यही स्थिति बने रहने की संभावना है. अगर उसके बाद भी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें गिरती रही तो भारत में फ़िलहाल कीमतों में उछाल नहीं आएगा. 


चुनावों में हर बार थमीं कीमतें : - 2022 में फरवरी - मार्च में यूपी, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर और पंजाब के चुनाव हुए। इस दौरान 102 दिनों से अधिक समय से पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर हैं। 2020 में 28 अक्टूबर से 7 नवंबर के दौरान बिहार विधानसभा के चुनाव हुए और 10 नवंबर को नतीजे आए। इस दौरान 2 सितंबर से 19 नवंबर के बीच पेट्रोल-डीजल के स्थिर रहे। दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भी 2020 की  शुरुआत में 12 जनवरी से 23 फरवरी तक पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े थे। 2019 में अप्रैल-मई के दौरान हुए लोकसभा चुनावों में भी तेल कंपनियों ने दाम नहीं बढ़ाए थे। मतदान का अंतिम चरण संपन्न होते ही पेट्रोल एवं डीजल के भाव फिर से बढ़ने लगे थे। 2017 में भी पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान भी कीमतें नहीं बढ़ाई थीं। पंजाब, गोवा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और मणिपुर में जारी चुनाव प्रक्रिया के दौरान 16 जनवरी-1 अप्रैल, 2017 तक तेल कीमतें स्थिर बनी रही थीं। दिसंबर, 2017 में गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान भी करीब दो सप्ताह तक पेट्रोल एवं डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए थे।

अब रूस और यूक्रेन में युद्ध बरकरार रहने और चुनाव परिणाम आ जाने के बाद अगर दुनिया के बाजार में तेल की कीमतों में तेजी नहीं आई तो भारत में आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी. साथ इससे केंद्र सरकार के लिए बड़ा फायदा होगा और चुनाव के कारण कीमत न बढ़ाने का आरोप भी मिट जाएगा. 

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