बिहार भाजपा को नेतृत्वहीन बताकर बुरी तरह से फंस गए ज्ञानू, मिला नोटिस, पूछा - क्यों दिया ऐसा बयान

बिहार भाजपा को नेतृत्वहीन बताकर बुरी तरह से फंस गए ज्ञानू, मिला नोटिस, पूछा - क्यों दिया ऐसा बयान

PATNA : बिहार भाजपा में चल रही लड़ाई थमती नजर नहीं आ रही है। कुछ दिन पहले विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू ने बिहार भाजपा के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे, पार्टी को नेतृत्वहीन करार दिया था। वहीं अब इस बयान को लेकर खुद ज्ञानू पार्टी में अकेले पड़ते नजर आ रहे हैं। एक दिन पहले जहां भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता ने उन्हें भाषाई दरिद्र करार दिया था। वहीं अब उन्हें पार्टी की तरफ से नोटिस थमा दिया गया है। पार्टी के अनुशासन समिति की तरफ से भेजे गए नोटिस में ज्ञानू को 14 दिन की मोहलत दी गई है। इस दौरान उनसे पूछा गया है कि उन्होंने ऐसा बयान क्यों दिया और क्यों न उनके खिलाफ पार्टी की तरफ से कार्रवाई की जाए।

ज्ञानू को भेजे गए नोटिस को लेकर पार्टी के अनुशासन समिति के अध्यक्ष विनय सिंह ने कहा कि उनका बयान भाजपा के मर्यादा और अनुशासन के खिलाफ है। इसलिए विधायक से 14 दिनों के अंदर जवाब मांगा गया है कि उन्होंने पार्टी के खिलाफ क्यों बयान दिया? साथ ही यह भी पूछा है कि आपके खिलाफ क्यों न अनुशानात्मक कार्रवाई की जाए?

भारतीय जनता पार्टी ने बिहार में अपने ही विधायक को नोटिस थमा दिया है। साथ ही उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा है। गुरुवार को यह नोटिस भाजपा ने बाढ़ से अपने विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू को भेजा है। विधायक पर आरोप है कि 5 दिसंबर को उन्होंने एक बयान दिया था। आरोप है कि उस बयान में विधायक ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ सख्त टिप्पणी की थी। पार्टी के अनुशासन समिति के अध्यक्ष विनय सिंह ने इस मामले में विधायक को नोटिस भेजा है।

 विवादित बयान देते रहे हैं ज्ञानू

ज्ञानू का यह बयान उस समय आया था, जब शीतकालीन सत्र के दौरान मंत्री जीवेश मिश्रा ने अपनी गाड़ी रोके जाने को लेकर सदन के अंदर नाराजगी जाहिर की थी, लेकिन अगले दिन उन्होंने इस पर चुप्पी साध ली। जिसके बाद ज्ञानू ने भाजपा विधायक के रवैय्ये को लेकर भाजपा नेतृत्व को ही कठघरे में खड़ा कर दिया था। दरअसल, ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू के उपर पार्टी विरोधी काम करने का आरोप पहले भी लगता रहा है।

 मगर, इस बार उनका अपनी ही पार्टी के खिलाफ बयान देना भारी पड़ता दिख रहा है। अपने बयान के जरिए विधायक ने बिहार में भाजपा को नेतृत्वविहीन बता दिया था। उन्होंने सीधे तौर पर प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल और पार्टी विधानमंडल दल के नेता व उप मुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद के उपर ही सवाल खड़ा कर दिया था, जो पार्टी के प्रदेश नेतृत्व को रास नहीं आया। इसलिए 4 दिनों के अंदर बयान देने वाले विधायक के उपर प्रदेश भाजपा की तरफ से आज नोटिस जारी कर शिकंजा कसने की कोशिश की गई।

बता दें कि भाजपा से पहले ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू जदयू में थे। कहा यह भी जा रहा है कि भाजपा में रहते हुए विधायक की नजदीकियां एक बार फिर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बढ़ने लगी है।


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