स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल पर जूनियर डॉक्टर, पटना, दरभंगा और बेतिया के अस्पतालों में किया प्रदर्शन

स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल पर जूनियर डॉक्टर, पटना, दरभंगा और बेतिया के अस्पतालों में किया प्रदर्शन

PATNA : बिहार के दूसरे सबसे बड़े अस्पताल एमएमसीएच में भी आज से जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल की घोषणा कर दी। हड़ताल कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि जिस तरह से हमसे काम लिया जाता है। उस तरह से हमलोग को स्टाइपेंड नही मिल पाता है। बिहार से दूसरे राज्यों की अगर बात करे तो वहां लगभग 25 से 30 हज़ार रुपए जूनियर डॉक्टरों को मिलता है। जबकि हमलोगों को यहां 15 हज़ार रूपये ही मिल पाता है। इसलिए हमारे मांग है कि समान काम समान वेतन हमे भी मिले। इन्ही मुद्दों को लेकर सरकार तक हमारी बातें पहुँचे। इसलिए हमने हड़ताल पर जाने का निर्णय ले लिया है। हालाँकि इस दौरान रजिस्ट्रेशन काउंटर को बंद करा दिया गया है। लेकिन इमरजेंसी सेवा को बाधित नहीं किया गया है।


वहीँ स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के जूनियर डॉक्टरों ने ओपीडी में ताला लगाकर कार्य बहिष्कार कर दिया है। इससे ओपीडी में इलाज कराने आए मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलन कर रहे जूनियर डॉक्टरों का कहना है की हम लोगों को 15 हजार के करीब प्रति माह के हिसाब से दिया जा रहा है। जो प्रतिदिन का 500 रुपया होता है। यह एक राजमिस्त्री की मजदूरी से भी कम है। वहीं आंदोलन कर रहे जूनियर डॉक्टर सात्विक ने कहा कि सरकार द्वारा पिछले 4 वर्षों से स्टाइपेंड का पुनरीक्षण नहीं किया गया है। वर्ष 2017 में सरकार द्वारा यह संकल्प दिया गया था कि प्रत्येक 3 वर्ष में इसका पुनरीक्षण होगा। लेकिन सरकार अपने संकल्पों से लगातार पीछे भाग रही है। अपनी मांगों को लेकर हम लोगों ने कई बार आंदोलन किया। लेकिन आश्वासन के अलावा हम लोगों को किसी प्रकार का लाभ आज तक नहीं मिला है। 

वही सात्विक ने कहा कि फिलहाल हमलोगों को 14 हजार 700 सौ रुपया मिल रहा है। हमलोगों की मांग है कि उसे बढ़ा कर 35 हजार रुपया किया जाए। उन्होंने कहा कि आपातकालीन सेवा फिलहाल बहाल है। उसके अलावा ओपीडी तथा अन्य विभागों से हम लोगों ने अपने आप को अलग कर लिया है। उन्होंने कहा कि जब तक हम लोगों की मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तब तक हम लोगों का आंदोलन जारी रहेगा।

उधर जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल का असर बेतिया के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में भी देखने को मिल रहा है। जहाँ ओपीडी के बाहर इंटर्न चिकित्सक अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहें है तो वहीं ओपीडी सेवा बाधित होने से मरीजो को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिले के दूर दराज से आए मरीज घन्टो से कतार में खड़े है। लेकिन ओपीडी बन्द होने के कारण मरीजों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा है। वही हड़ताली चिकित्सकों ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि बिहार के ही अन्य मेडिकल कॉलेजों में 30 हजार तक स्टाइपेन मेडिकल छात्रों को दी जा रही है। जबकि बेतिया मेडिकल कॉलेज में छात्रों को महज 15 हजार का स्टाइपेंड दिया जा रहा है जो एक दिहाड़ी मजदूर की मजदूरी से भी कम है। छात्रों ने मांग करते हुए कहा कि एक देश एक स्टाइपेंड सरकार लागू करे और अगर ऐसा नहीं होता है तो ओपीडी और इमरजेंसी सेवा को भी हमलोग जल्द ही बंद कर देंगे।

पटनासिटी से रजनीश, दरभंगा से वरुण और बेतिया से आशीष कुमार की रिपोर्ट 

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