कैसे प्रोफेसर से राजनीति के ब्रह्म बाबा बने रघुवंश प्रसाद, लालू यादव ने कहा- रघुवंश बाबू ये आपने क्या किया...

कैसे प्रोफेसर से राजनीति के ब्रह्म बाबा बने रघुवंश प्रसाद, लालू यादव ने कहा- रघुवंश बाबू ये आपने क्या किया...

पटना : महान समाजवादी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह का आज दिल्ली के एम्स में निधन हो गया. राजनीति के ब्रह्म बाबा कहे जाने वाले रघुवंश बाबू ने आज दिल्ली के एम्स में अंतिम सांस ली.रघुवंश प्रसाद सिंह पिछले 4 अगस्त से ही दिल्ली के एम्स में इलाजरत थे और वह पिछले 4 दिनों से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर चल रहे थे लेकिन आखिरकार कद्दावर नेता की मौत से जिंदगी की जंग हार गए. रघुवंश प्रसाद के निधन के बाद पूरे बिहार के सियासत में शोक की लहर फैल गई है. सीएम नीतीश कुमार ने रघुवंश प्रसाद के निधन पर शोक जाहिर किया है.

लालू ने कहा- ये आपने क्या किया
राजद सुप्रीमो लालू यादव ने मार्मिक ट्वीट किया है. लालू यादव ने ट्वीट कर लिखा है कि प्रिय रघुवंश बाबू ये आपने क्या किया?मैंने परसो ही आपसे कहा था आप कहीं नहीं जा रहे लेकिन आप इतनी दूर चले गए.निशब्द हूं बहुत दुखी हूं , बहुत याद आएंगे.

प्रोफेसर से राजनीति के ब्रह्म बाबा तक की कहानी
बिहार और समूचे देश भर में रघुवंश प्रसाद सिंह की पहचान एक प्रखर समाजवादी नेता के तौर पर थी. बेदाग और बेबाक अंदाज वाले रघुवंश बाबू को शुरू से ही पढ़ने और लोगों के बीच में रहने का शौक रहा था.रघुवंश प्रसाद सिंह राजनेता बाद में बने और प्रोफेसर पहले. बिहार यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त करने के बाद डॉ रघुवंश प्रसाद सिंह ने साल 1969 से 1974 के बीच करीब 5 सालों तक सीतामढ़ी के गोयनका कॉलेज में बच्चों को गणित पढ़ाया. गणित के प्रोफेसर के तौर पर डॉ रघुवंश प्रसाद सिंह ने नौकरी भी की और इस बीच कई आंदोलनों में वह जेल भी गए. पहली बार 1970 में रघुवंश प्रसाद टीचर्स मूवमेंट के दौरान जेल गए. उसके बाद जब वो कर्पूरी ठाकुर के संपर्क में आए तब साल 1973 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के आंदोलन के दौरान फिर से जेल चले गए. इसके बाद तो उनके जेल आने जाने का सिलसिला ही शुरू हो गया.  

बुरे वक्त में लालू को दिया था सहारा
रघुवंश प्रसाद 1977 में पहली मर्तबा विधायक बने थे. बेलसंड से उनकी जीत का सिलसिला 1985 तक चलता रहा. इस बीच 1988 में कर्पूरी ठाकुर का अचानक निधन हो गया. सूबे में जगन्नाथ मिश्र की सरकार थी. लालू प्रसाद यादव कर्पूरी के खाली जूतों पर अपना दावा जता रहे थे. रघुवंश प्रसाद सिंह ने इस गाढ़े समय में लालू का साथ दिया. यहां से लालू और उनके बीच की करीबी शुरू हुई. 1990 में बिहार विधानसभा के लिए चुनाव हुए. रघुवंश प्रसाद सिंह के सामने खड़े थे कांग्रेस के दिग्विजय प्रताप सिंह. रघुवंश प्रसाद सिंह 2,405 के करीबी मार्जिन से चुनाव हार गए. रघुवंश ने इस हार के लिए जनता दल के भीतर के ही कई नेताओं को जिम्मेदार ठहराया. रघुवंश चुनाव हार गए थे लेकिन सूबे में जनता दल चुनाव जीतने में कामयाब रहा. लालू प्रसाद यादव नाटकीय अंदाज में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे. लालू को 1988 में रघुवंश प्रसाद सिंह द्वारा दी गई मदद याद थी. लिहाजा उन्हें विधान परिषद भेज दिया गया. 1995 में लालू मंत्रिमंडल में मंत्री बना दिए गए. ऊर्जा और पुनर्वास का महकमा दिया गया.

1996 में वैशाली से संसद पहुंचे थे रघुवंश बाबू
1996 के लोकसभा चुनाव में लालू यादव के कहने पर रघुवंश प्रसाद सिंह लोकसभा चुनाव लड़ गए. बिहार के वैशाली से. सामने लड़ रहे थे समता पार्टी के वृषन पटेल. रघुवंश प्रसाद सिंह 62,683 के मार्जिन से चुनाव जीतने में कामयाब रहे. रघुवंश प्रसाद सिंह पटना से दिल्ली आ गए. केंद्र में जनता दल गठबंधन सत्ता में आई. देवेगौड़ा प्रधानमन्त्री बने. रघुवंश बिहार कोटे से केंद्र में राज्य मंत्री बनाए गए. पशु पालन और डेयरी महकमे का स्वतंत्र प्रभार. अप्रैल 1997 में देवेगौड़ा को एक नाटकीय घटनाक्रम में प्रधानमन्त्री की कुर्सी गंवानी पड़ी. इंद्र कुमार गुजराल नए प्रधानमन्त्री बने और रघुवंश प्रसाद सिंह को खाद्य और उपभोक्ता मंत्रालय में भेज दिया गया.

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