BJP के तल्ख तेवर के बाद मुकेश सहनी का सरेंडर! शॉट टर्म वाली विप सीट स्वीकार करने को हुए तैयार, सुबह में किया था इनकार

BJP के तल्ख तेवर के बाद मुकेश सहनी का सरेंडर! शॉट टर्म वाली विप सीट स्वीकार करने को हुए तैयार, सुबह में किया था इनकार

पटना: बिहार की सियासत में हर दिन कुछ नया हो रहा है। एनडीए की सहयोगी वीआईपी चीफ मुकेश सहनी औंधे मुंह गिरे हैं. बीजेपी के सख्त रूख के बाद मंत्री मुकेश सहनी बैकफुट पर आ गए हैं. जानकार बताते हैं कि वे बीजेपी की शर्त मानने को तैयार हो गए हैं.सिर्फ ऐलान होना बाकी है।इसके पहले मुकेश सहनी की तरफ से साफ कह दिया गया था कि वे शॉर्ट टर्म के लिए विधान परिषद में नहीं जायेंगे।मुकेश सहनी की तरफ से पहले विप की सीट स्वीकार नहीं करने का बयान जारी हुआ फिर कुछ देर के बाद उस बयान को वापस ले लिया गया।  

बीजेपी के सख्त रूख के बाद सहनी मुश्किल में फंसे

सुबह-सुबह वीआईपी चीफ मुकेश सहनी ने भाजपा को साफ बता दिया था कि वह शॉर्ट टर्म के लिए विधान परिषद में जाने को इच्छुक नहीं है। सीधे भाषा में कहा जाए तो मुकेश सहनी ने विप की दोनों सीटों में किसी पर उम्मीदवार बनने से इनकार कर दिया। वीआईपी की तरफ से आज रविवार को इस संबंध में बयान भी जारी किया गया था लेकिन थोड़ी देर बाद ही बयान को वापस भी ले लिया गया । मीडिया में खबर सामने आने के बाद बीजेपी नेतृत्व एक्टिव हो गई। बीजेपी की तरफ से मुकेश सहनी से संपर्क साधा गया और साफ मैसेज दे दिया गया कि आपको हमारा निर्णय स्वीकार करना होगा। बीजेपी के तल्ख तेवर के बाद मुकेश सहनी बैकफुट पर आ गए।जानकार सूत्रों ने बताया कि भाजपा के सख्त रूख के बाद मुकेश सहनी को शॉर्ट टर्म वाला विप की सीट स्वीकार करना होगा। बयान वापस लेने के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि मुकेश सहनी के लिए शॉर्ट टर्म वाली विप सीट स्वीकार करने के अलावे कोई विकल्प नहीं है।

बीजेपी ने शाहनवाज हुसैन को बनाया है उम्मीदवार

बता दें, दो सीटों में से एक सीट पर भाजपा ने अपने दिग्गज नेता सैयद शाहनवाज हुसैन को उम्मीदवार घोषित किया है। शाहनवाज हुसैन को सुशील कुमार मोदी की खाली हुई सीट पर उम्मीदवार बनाया जा रहा है। जिसमें अभी 41 महीने का कार्यकाल बचा हुआ है। वहीं दूसरी सीट पर विनोद नारायण झा की खाली हुई सीट पर सिर्फ डेढ़ साल का समय बचा हुआ है। मुकेश सहनी को इसी सीट पर उम्मीदवार बनाए जाने का प्रस्ताव है। लेकिन मुकेश सहनी ने पहले स्पष्ट किया था कि वह पूरे 72 माह के लिए से विधान परिषद जाना पसंद करेंगे, इसलिए दोनों सीटों में किसी पर वह उम्मीदवार नहीं बनेंगे।




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