नीतीश की घातक चाल : बीजेपी को बीजेपी के ही हथियार से मात करने का खेल शुरू, ज्ञानू कभी नीतीश के थे हम-दम... पढिये इनसाइड स्टोरी

नीतीश की घातक चाल : बीजेपी को बीजेपी के ही हथियार से मात करने का खेल शुरू, ज्ञानू कभी नीतीश के थे हम-दम... पढिये इनसाइड स्टोरी

पटना. बिहार भाजपा नेतृत्वविहीन हैं. बिहार सरकार में शामिल भाजपा कोटे के ज्यादातर मंत्री भ्रष्ट हैं. भाजपाई मंत्री रिश्वत लेते हैं. बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल के पास पार्टी चलाने का कोई विजन नहीं है. ऐसा कहना है भाजपा के ही विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू का. लेकिन, सवाल है कि आखिर ज्ञानू अचानक से अपनी ही पार्टी को कठघरे में क्यों खड़े कर रहे हैं? वे अपने ही दल से नाराज हैं या किसी महत्वाकांक्षा के लिए वे अपने दल को निशाने पर ले रहे हैं. या फिर ज्ञानू किसी के इशारे पर भाजपा और अपने ही दल के मंत्रियों को ‘नीचा’ दिखाने पर तुले हैं. ऐसे कई सवाल हैं जिसका जवाब विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू को देना है.

दरअसल बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में चल रही एनडीए सरकार भले बाहर से एकजुट दिखे लेकिन भीतरखाने सब कुछ ठीक नहीं कहा जा सकता. आए दिन भाजपा और जदयू की ओर से कोई न कोई न नेता ऑन-रिकोर्ड या ऑफ-रिकोर्ड यह बोलते रहते हैं कि एक दूसरे के नेताओं को उचित सम्मान नहीं मिलता. 

पिछले सप्ताह ही जब विधानसभा का शीतकालीन सत्र चल रहा था उस समय भी भाजपा मंत्री जीवेश मिश्रा की गाड़ी सुरक्षाकर्मियों द्वारा रोकने पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ था. भाजपा की एक महिला विधायक को नीतीश कुमार द्वारा एक बैठक में सार्वजनिक रूप से ‘सुंदर’ कहने पर भी खूब हंगामा मच चुका है. उस समय कई भाजपा नेताओं ने कहा था कि जानबूझकर भाजपा नेताओं को जदयू की ओर से अपमानित किया जाता है. 

पुराने साथी रहे हैं नीतीश और ज्ञानू

अब जब ज्ञानू ने अपने ही दल पर हमला बोला है तब इसके पीछे के कारणों को तलाशना जरूरी है. हाल के समय में ज्ञानू की नीतीश कुमार से नजदीकियां बढ़ी हैं. ऐसे भी ज्ञानू पहले जदयू में थे. वे 2015 में जदयू से नाराज होकर भाजपा में आए थे. जबकि उसके पूर्व 1989 से 2004 तक जब नीतीश कुमार बाढ़ संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे तब ज्ञानू उनके नजदीकियों में थे. ऐसे में एक बार फिर से दोनों की बढ़ी नजदीकियों से कई कयास लगाए जा रहे है. इसमें मुख्य है कि कहीं नीतीश ने भाजपा विधायक ज्ञानू को हथियार बनाकर तो नहीं पेश किया है क्योंकि जिस तरह से कई मुद्दों पर भाजपा नेताओं की ओर से नीतीश कुमार पर टीका-टिप्पणियों होती हैं उसे मात देने के लिए अपने पुराने साथी ज्ञानू का साथ नीतीश को मिल गया हो. 

ज्ञानू की पार्टी से नाराजगी की अंदरखाने की खबर भी लम्बे समय से चर्चा में रही है. वे मंत्री पद के दावेदार माने जाते थे लेकिन उन्हें भाजपा कोटे से मंत्री नहीं बनाया गया. नीतीश सरकार गठन के दौरान भी जब ज्ञानू को मंत्री नहीं बनाया गया था तब भी उन्होंने भाजपा पर मंत्री बनाए जाने में जातीय समीकरणों का ख्याल नहीं रखने का आरोप लगाया था. अब एक बार से बगावती सुर अलाप कर उन्होंने भाजपा नेतृत्व को कठघरे में खड़ा कर दिया है. 

सवाल लाजमी है. या तो भाजपा नेतृत्व और मंत्रियों पर ज्ञानू ने जो सार्वजनिक आरोप लगाया है वह सच है और अगर नहीं तो क्या पार्टी ज्ञानू पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी. 

प्रिय दर्शन शर्मा की रिपोर्ट


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