अफसर बहू का वेलकम : जब अफसर बनकर पहली बार अपने ससुराल पहुंची विवाहिता, ग्रामीणों ने इस तरह किया स्वागत

अफसर बहू का वेलकम : जब अफसर बनकर पहली बार अपने ससुराल पहुंची विवाहिता, ग्रामीणों ने इस तरह किया स्वागत

AURANGABAD : गांव में पटाखे छूट रहे हैं, बैंड बाजा बज रहा है। सैकड़ों पुरुष महिलाएं सड़क पर हाथों में माला और ढोल नगाड़े बजाते हुए जा रहे हैं। यह किसी राजनेता के स्वागत के लिए नहीं है। बल्कि गांव की बहू के लिए है। जो बीपीएससी की परीक्षा में सफलता पाने के बाद पहली बार अपने ससुराल पहुंची थी। गांव की बहू की इस कामयाबी के बाद ग्रामीणों ने अपने सिर आंखों पर बिठा लिया। ज्योंही वह गाड़ी से उतरी, लोगों ने उनके स्वागत में फूलों की बारिश शुरू कर दी। 

अफसर बहू की इस अनोखे स्वागत की घटना औरंगाबाद जिले की है। जहां रफीगंज प्रखंड के चरकावां पंचायत के  बदोपुर गांव में ब्याही गयी अर्चना वर्मा ने बीपीएससी परीक्षा में 576वां रैंक हासिल किया है। अर्चना का चयन प्रखंड विकास पदाधिकारी के लिए किया गया है। अफसर चुने जाने के बाद बुधवार को वह पहली बार अपने पति के साथ ससुराल पहुंची। जहां ग्रामीणों ने गांव की बहू का भव्य स्वागत किया तथा उनका नागरिक अभिनंदन किया। इस दौरान अर्चना ने भी किसी को निराश नहीं किया और गांव के बड़ों का आशीर्वाद लिया।

गांव में हुए स्वागत से अभिभूत दिखी अर्चना ने बताया कि वह  पटना में अपने पति के साथ रहकर तैयारी करती थी उन्होंने अपने लक्ष्य प्राप्ति का श्रेय माता -पिता, पति के साथ साथ अपने कोचिंग के शिक्षकों को दी। उन्होंने कहा कि अगर आदमी दृढ़ संकल्पित है तो कोई भी मुकाम हासिल कर सकता है।

औरंगाबाद की बहू अर्चना ने बीपीएससी की परीक्षा में 576 वां रैंक लाकर बनी प्रखंड विकास पदाधिकारी, अर्चना ने न सिर्फ गांव का नाम रौशन किया है बल्कि जिले को भी गौरवान्वित किया है। परिजनों और ग्रामीणों ने ढोल नगाड़ों के साथ किया भब्य स्वागत ।                  एंकर :- औरंगाबाद जिले के रफीगंज प्रखंड के चरकावां पंचायत के  बदोपुर गांव में बिहार लोक सेवा आयोग के परीक्षा पास कर प्रखंड विकास पदाधिकारी बनी गांव की बहू अर्चना वर्मा को ससुराल में ढोल नगाड़े के साथ भव्य स्वागत किया गया ।सफलतापूर्वक पद प्राप्ति के बाद पहली बार अपने ससुराल बद्दोपुर पहुंची अर्चना का धूमधाम से परिवार वालों एवं ग्रामीणों ने अभिनंदन किया। अर्चना पटना में अपने पति के साथ रहकर तैयारी करती थी उन्होंने अपने लक्ष्य प्राप्ति का श्रेय माता -पिता, पति के साथ साथ अपने कोचिंग के शिक्षकों को दी। उन्होंने कहा कि अगर आदमी दृढ़ संकल्पित है तो कोई भी मुकाम हासिल कर सकता है।

दीनानाथ मौआर की रिपोर्ट

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