हिन्दूओं की भावना से खेलना बिहार के पूर्व सीएम की बन चुकी है आदत, कभी धर्मांतरण को बताया सही, कभी सवर्णों को विदेशी बताकर रह चुके हैं विवादों में

हिन्दूओं की भावना से खेलना बिहार के पूर्व सीएम की बन चुकी है आदत, कभी धर्मांतरण को बताया सही, कभी सवर्णों को विदेशी बताकर रह चुके हैं विवादों में

PATNA : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी द्वारा रामायण और श्रीराम के अस्तित्व को लेकर दिया गया ताजा बयान का जमकर विरोध किया जा रहा है। खासकर भाजपा के मंत्रियों और विधायकों ने उन्हें आड़े हाथों लिया है। भाजपा के विधायक हरिभूषण बचौल ने उन्हें राक्षस तक कह दिया है। हालांकि इसके बाद भी मांझी अपने बयान पर कायम रहने की बात कही है। लेकिन यह पहली बार नहीं है कि मांझी ने कोई विवादित बयान दिया हो। जिससे हिन्दूओं की भावना को ठेस पहुंची हो। 

समय समय पर चर्चा में बने  रहने के लिए वह कोई न कोई विवादास्पद बयान देते रहे हैं। लगभग दो माह गया में आदिवासी हिन्दू बस्तियों में हो रहे धर्मान्तरण के मुद्दे पर भी विवादित बयान दिया था। मांझी ने कहा था कि हिन्दू संगठनों में पिछड़ों को आज भी सम्मान नहीं दिया जाता है। जिसके कारण अगर पिछड़े लोग दूसरे धर्म की तरफ जा रहै हैं तो उसमें कोई गलत नहीं है, जहां सम्मान मिलेगा, लोगे वहीं जाएंगे। इस दौरान उन्होंने सीधे सीधे हिन्दू संगठनों पर सवाल उठा दिए थे।

सवर्णों को बता दिया था विदेशी

मांझी के विवादित बयान यहीं पर नहीं थमते, कुछ साल पहले बिहार के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंनें सवर्णों के भारतीय होने को लेकर सवाल उठा दिए थे। मांझी ने सवर्णों को विदेशी मूल का करार दिया था. उन्होंने आदिवासी, अनुसूचित जाति और गरीबों को भारत का मूल निवासी बताया था। मांझी के इस बयान पर भी उस समय काफी चर्चा हुई थी और विपक्ष में बैठी भाजपा ने मांझी के इस बयान को लेकर निशाने पर लिया था और उन्हें देशद्रोही तक कह डाला था।

अल्लाह को बता दिया था बहरा

जीतन राम मांझी के विवादित बयान का सिलसिला यहीं पर नहीं थमता है। कुछ समय उन्होंने पहले एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा हम मंदिर में जाकर घंटी बजाएं और मस्जिद में जाकर अल्लाह को चिल्लाकर याद करें, जैसे लगता है कि अल्लाह बहरा हो गए हैं।


सरकारी मशीनरी में व्याप्त है भ्रष्टाचार

मुख्यमंत्री रहते हुए मांझी ने अधिकारियों के एक समूह को संबोधित करते हुए कहा था, 'मुझे स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं है कि सरकारी मशीनरी में ऊपर से लेकर नीचे तक भ्रष्टाचार व्याप्त है. कुछ साल पहले बिजली बिल में संशोधन करवाने के लिए मेरे परिवार को रिश्वत देनी पड़ी थी.'

- अपने गृह जिला गया में आयोजित एक कार्यक्रम में नीतीश की भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलेरेंस नीति' के दावे की धज्जियां उड़ाते हुए मांझी ने कहा था कि नीतीश सरकार में विकास भले हुआ हो, परंतु भ्रष्टाचार तब भी कम नहीं हुआ.

अंतरजातीय विवाह का किया समर्थन

मांझी ने दलितों और पिछड़ी जातियों के युवकों को अंतरजातीय विवाह करने की नसीहत दी थी. इन सभी बयानों के बाद पार्टी के नेताओं को सफाई देने के लिए सामने आना पड़ा था.

केंद्रीय मंत्रियों के बिहार में इंट्री पर बैन

मुख्यमंत्री के तौर पर मांझी ने बिहार से ताल्लुक रखने वाले केंद्रीय मंत्रियों को राज्य में नहीं घुसने देने की चेतावनी देते हुए कहा था, 'अगर ये सातभैया राज्य के विकास में मदद नहीं करते हैं, तो उन्हें बिहार में घुसने नहीं देंगे. वे सब दिल्ली में ही रहें.' उन्होंने मोतिहारी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए डॉक्टरों के हाथ काट देने की चेतावनी दे दी थी.

चिराग, तेजस्वी और राहुल गांधी को हनीमून पर भेजा

बीते जून माह में जीतन राम माझी ने पत्रकारों को दिए बयान में कहा था, "देश के तीन युवराज राहुल गांधी, चिराग पासवान, और तेजस्वी यादव लगता है बाहर हनीमून मनाने जाते हैं. वे यहीं नहीं रुके.  उन्होंने हनीमून की मंशा पर आपत्तिजनक इशारा करते हुए यह तक कह दिया कि पता नहीं क्या करने जाते हैं
 
 

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