औरंगाबाद में निर्दलीय प्रत्याशी रहे प्रमोद सिंह की हो सकती है घर वापसी, कल लोजपा (रा) का थाम सकते हैं दामन

औरंगाबाद में निर्दलीय प्रत्याशी रहे प्रमोद सिंह की हो सकती है घर वापसी, कल लोजपा (रा) का थाम सकते हैं दामन

AURANGABAD : राजनीति में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। कौन सा नेता कब पार्टी बदलकर किस दल में चला जाए कहा नहीं जा सकता। लेकिन औरंगाबाद में एक ऐसे नेता है, जो लगभग हर चुनाव में दल बदलते हैं। हम बात कर रहे हैं निर्दलीय प्रत्याशी प्रमोद सिंह का। जिन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव में रफीगंज विधानसभा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। हालाँकि उन्हें सफलता नहीं मिली थी। इसके पूर्व भी 2015 में उन्होंने लोजपा प्रत्याशी के रूप में रफीगंज विधानसभा से चुनाव लड़ा था। लेकिन उस बार भी सफलता नहीं मिली थी। 


उन्होंने अपनी सफलता को लेकर लगातार कई पार्टियों का दरवाजा खटखटाया। कभी लोजपा तो कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस का भी दामन थामा। लेकिन इन्हें कहीं पर भी बडे राजनेताओं के द्वारा तरजीह नहीं दिया गया। इसके बाद अब 26 तारीख को फिर उन्होंने अपने भूले भटके घर लोजपा में वापसी जाने को लेकर फिर से एक बार तैयारी शुरू कर दिया है। आपको बता दें की कल यानी 26 अगस्त को औरंगाबाद के बंधन रिसोर्ट में लोजपा के द्वारा एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। जिसमे रफीगंज विधानसभा के पूर्व निर्दलीय प्रत्याशी रहे प्रमोद सिंह को लोजपा में शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है। 

हालाँकि प्रमोद सिंह का राजनैतिक अनुभव कोई खास नहीं रहा है। इन्होंने अपनी राजनैतिक जीवन का शुरुआत 2015 में शुरू किया था। जिस समय लोजपा का नेतृत्व रामविलास पासवान कर रहे थे। लेकिन जैसे ही रामविलास पासवान का असमय निधन हो गया था। तब प्रमोद सिंह का अपने पार्टी पर भरोसा नही रहा और उन्होंने कुर्सी की चाहत में लोजपा का दामन छोड़ दिया और उसने अपना रुख फिर एक बार कांग्रेस पार्टी की ओर कर लिया। लेकिन कांग्रेस पार्टी का स्तम्भ कहे जाने वाले पूर्ब सांसद निखिल कुमार के समक्ष अपने आप मे ही उन्हें अपना कद बौना दिखने लगा। 

तब इन्होंने कांग्रेस पार्टी को भी छोड़ दिया और 2020 में निर्दलीय प्रत्यासी के रूप में रफीगंज विधानसभा से चुनाव लड़ा। जिसमे उन्हें जोरदार झटका लगा और अब वह चिराग पासवान की बढ़ती लोकप्रियता को देख कर एक बार फिर से लोजपा(रामविलास) की सदस्यता ग्रहण करने हेतु तैयारिया शुरू कर दिया हैं। अब यह देखना लाजमी होगा की क्या चिराग पासवान फिर से अपने पार्टी में भगोड़े को स्थान दे पाते है या नहीं।

औरंगाबाद से दीनानाथ मौआर की रिपोर्ट  

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