नहाय खाय के साथ छठ महापर्व की हुई शुरुआत, भोजपुर और सासाराम के सूर्यमंदिरों में तैयारी पूरी

नहाय खाय के साथ छठ महापर्व की हुई शुरुआत, भोजपुर और सासाराम के सूर्यमंदिरों में तैयारी पूरी

ARA : बिहार में नहाय खाय के साथ 4 दिवसीय छठ पर्व की शुरुआत हो चुकी है। इस पर्व में उगते और डूबते सूर्य की पूजा अर्चना की जाती है। भोजपुर के उदवंतनगर प्रखंड का बेलाउर गांव भी सूर्य मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यही वजह है की बेलाउर गांव को भगवान भास्कर की नगरी भी कहा जाता है। इसकी मान्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देश-विदेश के लोग यहां मन्नत पूरी होने की आस में पहुंचते हैं। यहां भगवान भास्कर के मंदिर की अलग विशेषता है। हर जगह भगवान के मंदिर का मुख्य द्वार पूरब की ओर देखा जाता है, लेकिन यहां पर मंदिर का मुख्य द्वार पश्चिम की ओर स्थापित है। विशालकाय भैरवावंद तालाब के बीचोंबीच भगवान भास्कर का मंदिर बना है, जो अन्य मंदिरों से अलग महत्व रखता है। बेलाउर में छठ का व्रत करने पूरे बिहार के कोने-कोने से तो लोग आते ही हैं, यहां यूपी व झारखंड सहित विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोग भी बड़ी संख्या में छठ व्रत करने आते हैं। बेलाउर के सूर्य मंदिर की ऐतिहासिक मान्यता है। जानकारी के अनुसार भोजपुर के करवासिन गांव निवासी मौनी बाबा द्वारा सूर्य मंदिर का निर्माण 1949 ई में कराया गया और सात घोड़े के रथ पर सारथी सहित भगवान भास्कर की मकराना पत्थर की मनमोहक मूर्ति स्थापित की गई थी। 

शाहाबाद के प्रसिद्ध बेलाउर के सूर्य मंदिर में मनोकामना सिक्का लेने की परंपरा है। यहां छठ व्रत करने वाले लोग मनोकामना सिक्का लेकर जाते हैं और मन्नतें पूरी होने के बाद छठ व्रत करने के साथ ही सिक्का वापस लौटा देते हैं। 

सूर्य मंदिर विकास समिति के लोगों व पुलिस प्रशासन द्वारा विशेष तैयारी की जाती है। यहां व्रतधारियों के ठहरने व उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये जाते हैं। रौशनी से पूरे छठ घाट का परिसर व रास्ता जगमग रहता है। लाइट व साउंड से सजावट अपनी अलग छाप छोड़ती है। पूरे परिसर में छठ गीत के धुन व कोई भी महत्वपूर्ण सूचना साउंड के माध्यम से दी जाती है। दूर-दराज से व्रत करने वाले लोग तो दो दिन पहले से ही यहां आ जाते हैं और व्रत पूरा करने के बाद ही जाते हैं। आरा मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर की दूरी पर आरा-सहार मुख्य मार्ग पर बेलाउर गांव में भगवान भास्कर का मंदिर स्थापित है। आने-जाने के लिए लोग अपने निजी वाहन सहित बस, जीप व ऑटो का इस्तेमाल करते हैं।

वहीँ सासाराम के बेदा स्थित सूर्य मंदिर की महिमा अपरंपार है। ऐसी मान्यता है कि छठ के समय यहां आकर पूजा अर्चना करने से लोगों की तमाम मनोकामना सिद्ध हो जाती हैं। यह सात घोड़ों पर सवार भगवान सूर्य की प्रतिमा है और यह सासाराम के बेदा स्थित सूर्य मंदिर में अवस्थित है। सबसे बड़ी बात है कि इस मंदिर के परिसर में एक बड़ा-सा तालाब है। जहां लोग छठ व्रत भी करते हैं। साल में दो बार यहां श्रद्धालुओं का मेला लगता है। ऐसे में छठ के दौरान यहां पूजा अर्चना करने का विशेष महत्व है। भगवान सूर्य की आराधना का एक प्रमुख स्थल है। लोगों का कहना है कि दूर-दूर से लोग यहां पूजा अर्चना एवं आराधना के अलावे छठ व्रत करने भी आते हैं। बड़ी बात यह है कि छठ के व्रत के उपरांत भी लोग यहां आकर दर्शन करते हैं। छठ सूर्य की आराधना का त्यौहार है। अस्ताचलगामी सूर्य से लेकर उदयीमान सूर्य को भी यहां लोग अर्ध देते हैं। इसके उपरांत लोग आकर यहां दर्शन करते हैं। मान्यता है कि छठ व्रत करने के बाद जब छठ व्रती इस मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं, तो उनकी तमाम मनोकामना सिद्ध हो जाती हैं तथा सुख-शांति एवं धन-धान्य की वृद्धि होती है। पुजारी कहते हैं कि स्थानीय लोगों की इस मंदिर के प्रति अगाध श्रद्धा है।

आरा से रविन्द्र कुमार और सासाराम से रंजन की रिपोर्ट

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