दुनिया को अलविदा कहने से पहले लालू फॅमिली को एक्सपोज कर गए रघुवंश बाबू, बढ़ गयी तेजस्वी की परेशानी

दुनिया को अलविदा कहने से पहले लालू फॅमिली को एक्सपोज कर गए रघुवंश बाबू, बढ़ गयी तेजस्वी की परेशानी

DESK : अपने 74 साल के जीवन में 50 साल सिर्फ राजनीति को देने वाले बिहार के कद्दावर नेता रघुवंश प्रसाद सिंह अब इस दुनिया में नहीं रहें. रघुवंश बाबू और लालू प्रसाद यादव की दोस्ती जगजाहिर है. सच को सच कहने में लालू के संकटमोचक रघुवंश बाबू ने संकोच नहीं की. लालू यादव के सुख दुःख में उनके साथ खड़े रहें. जब चारा घोटाला मामले में लालू यादव सजायाफ्ता पाए गए तब भी रघुवंश प्रसाद उनके साथ दिखे. लेकिन दुनिया को अलविदा कहने से पहले रघुवंश प्रसाद ने लालू परिवार को एक्सपोज कर दिया. पहले तो एक के बाद एक झटका देकर लालू यादव को चेताया कि पार्टी में कुछ भी सही नहीं हो रहा, लेकिन जब कोई प्रतिक्रिया नहीं आई तो उन्होंने पार्टी को गुड बाय कह दिया. 23 जून को पटना एम्स में भर्ती रहते ही उन्होंने लालू की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया. उसके बाद निधन से ठीक तीन दिन पहले पार्टी से इस्तीफा दे दिया. 


बढ़ गयी तेजस्वी की परेशानी 

रघुवंश प्रसाद सिंह हर मुद्दे पर बेबाकी से अपनी बात रखने के लिए जाने जाते थे. राजद में हो रहे अपमान को जब सह न सके तो उन्होंने अपनी दिल की बात कह दी.  खुद कभी सामने आकर तो तेजस्वी यादव के खिलाफ कुछ नहीं कहा, लेकिन लालू को भेजे इस्तीफे की चिट्‌ठी और फिर इसी संदर्भ में उनके लिखे संदेश से साफ था कि वह राजद में चल रहे परिवारवाद से परेशान थे। अंतिम समय में लालू परिवार के खिलाफ सामने आए उनके तेवर से लालू परिवार की परेशानी बढ़नी तय है। सबसे ज्यादा परेशानी तेजस्वी यादव को रघुवंश की छाप वाले राघोपुर सीट पर होगी, यह भी एक तरह से तय है।

रामा सिंह की एंट्री से थे परेशान 

एक तरफ जहां लालू-रघुवंश की दोस्ती पूरे बिहार में नामी रही तो वहीं दूसरी तरफ रघुवंश बाबू और रामा सिंह के बीच छत्तीस का आंकड़ा भी जगजाहिर है. एक दो नहीं बल्कि 20 साल से दोनों एक-दूसरे के कट्‌टर विरोधी थे. वैशाली सीट पर रामा सिंह हमेशा उनके खिलाफ रहे. 1996 से लगातार 5 बार वैशाली सीट पर राजद का झंडा गाड़ने वाले रघुवंश सिंह का विजय रथ भी 2014 में लोजपा के रामा सिंह ने ही रोका था. 20 साल की दुश्मनी और लगातार दो हार के कारण रघुवंश गुस्से में थे, जबकि 2020 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए तेजस्वी यादव रामा सिंह को राजद में लाने के लिए प्रयासरत थे. इसी के गुस्से में रघुवंश ने पहले उपाध्यक्ष का पद छोड़ा और फिर पार्टी से इस्तीफा दिया।

राघोपुर में फंसेगा पेच 

राजद के फॉरवर्ड नेताओं से रघुवंश प्रसाद सिंह की काफी बनती थी. फेस थे। लेकिन अंतिम समय में राजद में परिवारवाद के वर्चस्व को लेकर रघुवंश प्रसाद की टिप्पणी पार्टी के फॉरवर्ड नेताओं ब्रेक भी कर सकती है. और अगर ऐसा हुआ तो तेजस्वी को राघोपुर विधानसभा सीट पर बड़ी चुनौती मिलेगी. क्योंकि राघोपुर विधानसभा क्षेत्र में 50 हजार राजपूत वोटरों की संख्या है. ऐसे में तेजस्वी को इस वोट को कन्वर्ट कर पाना काफी चुनौतीपूर्ण होगा.  

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