कार सेवक रह चुके भाजपा नेता व पूर्व मंत्री ने कहा बाबरी कलंक को ढाह कर रामलला के मंदिर बनाने का स्वप्न अब साकार हो गया...

कार सेवक रह चुके भाजपा नेता व पूर्व मंत्री ने कहा बाबरी कलंक को ढाह कर रामलला के मंदिर बनाने का स्वप्न अब साकार हो गया...

DESK: विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष परम पूज्य स्वर्गवासी अशोक सिंघल जी के आवाहन पर तथा विश्व हिंदू परिषद के निर्णायक मंडल के घोषणा पर दक्षिण बिहार कार्य सेवा समिति के संयोजक श्याम नारायण दुबे जी के नेतृत्व में तथा जिला कार्य सेवा समिति के अध्यक्ष होने के नाते औरंगाबाद से मेरे नेतृत्व में 600 से अधिक कार्य सेवक अयोध्या गए थे, हम लोग को रहने के लिए स्वर्गीय काशी बाबा के आश्रम में स्वर्गीय राजेंद्र बाबा के देखरेख में रखा गया था। 

स्वर्गीय श्री काशी बाबा बिहार के औरंगाबाद जिला के धोबडीहा गांव के निवासी थे राजेंद्र बाबा ने हम लोगों के रहने की पूरी व्यवस्था की थी.  उसके बाद कार सेवा के क्रम में तेरा वैभव अमर रहे मां हम दिन चार रहे ना रहे के संकल्प लेने वाले कारसेवकों ने भारत माता के माथे पे कलंक बाबरी बाबरी मस्जिद को ढाह के गिरा दिया था।

    

माननीय कल्याण सिंह इस्तीफा दे चुके थे. केंद्र की कांग्रेस सरकार ने गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान की सरकार को भंग कर दिया था. इसके बाबजूद भी कारसेवक ढांचा को ध्वस्त कर उसे बराबर कर, टेंट लगाकर वहां रामलला को विराजमान कर दिया था. उसके उपरान्त प्रशासन द्वारा अयोध्या शहर को खाली करने का आदेश दिया. हम सभी लोग ट्रेन पकड़ कर औरंगाबाद लौटे. औरंगाबाद लौटने के बाद मदनपुर प्रखंड के वार, सिरीश, सुंदरगंज, मदनपुर में राम जन्म भूमि के प्रति वातावरण बनाने के लिए विशाल आमसभा किया गया. आमसभा में उमड़ते जनसैलाव को देखते हुए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक हाशमी के निर्देश पर मुझे मदनपुर से गिरफ्तार किया गया. हालांकि इसके पूर्व मुझे तीन बार गिरफ्तार किया जा चूका था, लेकिन दो मुकदमा औरंगाबाद के तत्कालीन जिलाधिकारी व वर्तमान मैं बिहार सरकार के मुख्य सचिव दीपक कुमार के जांच उपरांत समाप्त कर दिया गया था. फिर मदनपुर में गिरफ्तारी के बाद 1 महीने मैं और दिग्विजय सिंह जेल में रहे थे. जमानत उपरांत कोई भी नोटिस, कोई वारंट, बिना कुर्की जब्ती के मुझे फरार घोषित कर दिया गया था.

फरार घोषित किये जाने कि मुझे कोई जानकारी नहीं थी. नॉमिनेशन में मेरे द्वारा हर केस का नंबर दिया जाता था. 1995, 2000, 2005 (जनवरी और नवंबर) तथा 2010 में चुनाव लड़े कहीं कोई वारंट नहीं था.  2010 में विधायक बने और मंत्री बने, 2011 में हमारे शुभचिंतकों ने फरारी का कागज निकाला और उसे मुख्यमंत्री जी के जनता दरबार में पत्रकारों द्वारा जोरशोर से उठाया गया जिसमें मैं मंत्री होने के नाते उसमें शामिल था.  हमारे शुभचिंतक पत्रकार बंधुओं उस विषय जोड़-तोड़ के उस विषय को उठाए और और मुझे फरार घोषित का अंतर राष्ट्रीय न्यूज़ बनाएं. जनता दरबार समाप्त होने के बाद आदरणीय मुख्यमंत्री जी दिल्ली चले गए थे और मुझे मुख्यमंत्री आवास से फोन आया कि आपको आज इस्तीफा देना है.

 मैंने राम काज के लिए आदरणीय मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार 10:00 बजे रात्रि में माननीय मुख्यमंत्री जी के उस समय के सचिव सिद्धार्थ जी को अपना इस्तीफा दिया था. मुझ पर आईपीसी की धारा 188 और 144 था. मेरे ऊपर कोईआपराधिक कार्य करने का आरोप नहीं था. मैं 3 दिन जेल में रहा, बेल हुआ, 2 माह के बाद केस समाप्त हो गया और मुझे पुनः आदरणीय अरुण जेटली जी, आदरणीय कैलाशपति मिश्र जी (जो अब स्वर्ग सिधार गए हैं) और हमारे नेता बिहार भाजपा के स्तंभ आदरणीय सुशील कुमार मोदी जी, उस समय के संगठन महामंत्री आदरणीय हृदयनाथ जी, जिन के निर्देश पर मैंने इस्तीफा दिया था. आदरणीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी तथा उस समय के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडे जी, आदरणीय नंदकिशोर यादव जी, प्रेम कुमार जी, राजनाथ सिंह जी, रवि शंकर प्रसाद जी, नितिन गडकरी जी इस सबों के सहयोग एवं आशीर्वाद से और भगवान प्रभु श्री राम की कृपा से आदरणीय नीतीश कुमार जी के प्रस्ताव पर महामहिम राज्यपाल महोदय ने राजभवन में पुनः मंत्री का शपथ दिलवाया. 

तो भगवान राम कार्य के लिए और राम मंदिर के निर्माण के लिए मंत्री पद से इस्तीफा देने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है. जो बिहार के लिए स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा और जब परमपूज्य राष्ट्र ऋषि भारत माता के चौकीदार आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी मंदिर की नीव रखेंगे और इस आंदोलन को पूरे विश्व में एक रूप देने वाले आदरणीय लालकृष्ण आडवाणी जी, माननीय मुरली मनोहर जोशी जी, परम पूज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी, राम जन्मभूमि न्यास समिति के सभी पदाधिकारी, सभी संत विशेषकर हमारे वैष्णव गुरु वासुदेव आचार्य जी ( भास्कर ) जी सारे लोग उपस्थित रहेंगे.

मेरे जैसा एक साधारण बीघा पर पैदा होने वाला जिसके पिता के नाम को बिहार में आधा प्रतिशत भी लोग नहीं जानते होंगे, वह व्यक्ति रामाधार यह महसूस करेगा कि जिस तरह रामसेतु के निर्माण में एक गिलहरी ने भूमिका अदा किया थी उसी तरह राम मंदिर के निर्माण में गिलहरी के तरह सक्षम नहीं होते हुए भी मेरा थोड़ा सा प्रयास रहा है. और 5 अगस्त का दिन भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा. जिस कार्य के लिए लाखों कारसेवकों ने 500 साल से संघर्ष किया, कोठारी बंधुओं ने अपना प्राण गवाया, लाखों लोग जेल यात्रा किए, इस संकल्प के साथ रामलला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे. और आज यह सपना पूर्णरूपेण साकार हो रहा है

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