नीतीश के नेतृत्व को नकारा! अखिलेश, केजरीवाल, भागवंत मान को नीतीश की जगह केसीआर पसंद, रैली में होंगे शामिल

नीतीश के नेतृत्व को नकारा! अखिलेश, केजरीवाल, भागवंत मान को नीतीश की जगह केसीआर पसंद, रैली में होंगे शामिल

DESK : तेलंगाना के CM और भारत राष्ट्र समिति (BRS) के सुप्रीमो के चंद्रशेखर राव (KCR) आज खम्मम जिले में एक सार्वजनिक रैली करने जा रहे हैं। । इसमें KCR 2023 में होने वाले चुनावों की अपनी योजना का खुलासा करेंगे। KCR ने घोषणा की है कि इस रैली का केंद्रीय विषय 'अबकी बार किसान सरकार' है। इस रैली की खास बात यह है भाजपा और कांग्रेस को छोड़ ज्यादातर पार्टी के नेताओं को न्योता दिया गया है। जिनमें दिल्ली CM अरविंद केजरीवाल, पंजाब CM भगवंत सिंह मान, केरल CM पिनाराई विजयन, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के नेता डी राजा जैसे नाम शामिल हैं। 

नीतीश कुमार को निमंत्रण नहीं

जहां एक तरफ राजद और जदयू नीतीश कुमार को देश का अगला प्रधानमंत्री बनाने को लेकर लगातार प्रचार कर रही है। यह कहा जाता है कि नीतीश कुमार सभी दलों को एकजुट कर रहे हैं। लेकिन चौंकानेवाली बात यह बिहार के सीएम नीतीश कुमार को इस रैली के लिए नहीं बुलाया गया। जबकि उन तमाम नेताओं को बुलाया गया है, जिनसे कुछ माह पहले भाजपा के खिलाफ एकजुट होने के लिए नीतीश कुमार समर्थन मांगने के लिए गए हुए थे। लेकिन ज्यादातर ने भाजपा के साथ नीतीश कुमार से भी किनारा कर लिया है। अरविंद केजरीवाल पहले ही नीतीश कुमार का समर्थन करने से मना कर चुके हैं। वहीं अब अखिलेश यादव भी नीतीश कुमार से ज्यादा केसीआर के नेतृत्व पर भरोसा जता रहे हैं।

केसीआर खुद आए थे पटना

बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद केसीआर खुद पटना आए थे और नीतीश कुमार से मुलाकात की थी। लेकिन इस मुलाकात में ही दिख गया था कि दोनों नेताओं का एक ही लक्ष्य है। ऐसे में दोनों का एक साथ चल पाना मुश्किल है। जहां केसीआर मीडिया के सभी सवालों का जवाब खुल कर दे रहे थे। वहीं नीतीश कुमार बार-बार इससे बचने की कोशिश कर रहे थे।

नीतीश पर नहीं है यकीन

केसीआर की रैली में नीतीश कुमार को नहीं बुलाने से यह साफ हो गया है देश में ज्यादातर रीजनल पार्टियों के बीच नीतीश कुमार अपना भरोसा साबित नहीं कर सके हैं। पूर्व में उनके भाजपा के साथ बेहतर रिश्ते और बार बार पलटी मारनेवाली छवि के कारण कई पार्टियां अब भी मानती हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री कब  अपना विचार बदल देंगे, पिछले कुछ दिनों से बिहार की राजनीति में यह चर्चा शुरू हो गई है कि वह फिर से भाजपा के साथ जा सकते हैं। 


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