आरजेडी के दलित नेताओं के हमले का मंत्री अशोक चौधरी ने दिया करारा जवाब, बोले- नीतीश हैं दलित प्रेमी मुख्यमंत्री

आरजेडी के दलित नेताओं के हमले का मंत्री अशोक चौधरी ने दिया करारा जवाब, बोले- नीतीश हैं दलित प्रेमी मुख्यमंत्री

पटना :  बिहार विधानसभा चुनाव से पहले दलितों का मुद्दा गरमाता जा रहा है. दलित नेता का इधर से उधर जाने का सिलसिला भी तेज हो गया है.  हर राजनीति दल दलित वोटबैंक को अपने खेमे में करने के लिए रणनीति पर रणनीति बना रहा है. इसी कड़ी में तेजस्वी यादव ने आज अपने 4 दलित नेताओं को मैदान में उतारा. और दलितों के मुद्दे को लेकर नीतीश कुमार पर ताबाड़तोड़ हमला बोला. तो नीतीश सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने आरजेडी के हमले का करारा जवाब दिया है. 

बिहार सरकार के भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी ने कहा है कि नीतीश कुमार दलितों के लिए सोचने वाले और उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए प्रभावी योजनाओं का निर्माण एवं क्रियान्वयन कराने वाले नेता हैं. जिन्होंने बिहार की सत्ता में आने के बाद प्रदेश में पहली बार बिहार विधान सभा अध्यक्ष दो-दो बार एक महादलित उदय नारायण चैधरी को बनाया. महादलित जीतन राम मांझी को हमारे नेता ने बिहार प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया जो कि मेरे समझ से आजादी के बाद पहली बार हुआ. महादिलत श्याम रजक को भी बिहार प्रदेश में लंबे समय तक मंत्री बनाये रखा. कुछ लोगों का ये आरोप है कि हमारे नेता दलित विरोधी है. आंकड़े इस बात को प्रमाणित करते हैं कि पिछले 15 साल के कार्यकाल में किस तरह से सीएम नीतीश कुमार ने दलितों के उत्थान के लिए काम किया और दलितों को राजनीतिक, समाजिक और आर्थिक रूप से सम्पन्न करने का काम किया. 

 अशोक चौधरी ने बताया कि नीतीश कुमार दलित प्रेमी मुख्यमंत्री है. जिन्होंने बिहार की बागडोर संभालने के बाद राज्य में पहली बार 2007 अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित कल्याण विभाग का गठन किया. साल 2007 को अनुसूचित जनजातियों में महादलितो में शैक्षणिक, समाजिक, आर्थिक आदि सभी क्षेत्रों में सम्यक विकास हेतु अनुशंसा के लिए राज्य महादिलत आयोग बिहार का गठन किया एवं 2008 में महादलित विकास मिशन का गठन किया गया. 

नीतीश कुमार के नेतृत्व में पहली बार मार्च 2007 में राज्य में प्रथम बार आर्थिक सर्वेक्षण प्रकाशित किया गया. साथ ही आजादी के बाद पहली बार 2006-07 में विकास कार्यों पर 8647 करोड़ रुपये का रेकाॅड व्यय हुआ जो व्यय लक्ष्य का 102 प्रतिशत है. पहले जहां सम्पूर्ण समाज कल्याण विभाग का बजट केवल 40 करोड़ में सिमटा हुआ था. आज केवल अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग का बजट 1600 करोड़ है. इसके साथ ही वर्ष 2017-18 में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग में कुल आवंटित बजट का कुल युटिलाईजेशन 74.0 प्रतिशत एवं वर्ष 2018-19 में कुल बजट का 76.1 प्रतिशत युटिलाईजेशन किया गया जिसकी जानकारी आर्थिक सर्वें 2020 में दी गयी है. 

   इस राज्य में त्रिस्तरीय पंचायतों की तरह नगर निकायों के सभी कोटि के पदों पर दलित एवं आदिवासियों के लिए उनकी आबादी के अनुरूप आरक्षण कर उनका प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया. साथ ही राज्य के 38 जिलों में कुल 19037 ग्राम पंचायत सदस्य पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं. अनुसूचित जनजाति के लिए कुल 1223 पद आरक्षित है. इसके साथ ही मुखिया हेतु 1388 पद अनुसूचित जाति के लिए एवं 92 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. जबकि जिला परिषद् में इनकी भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. जबकि जिला परिषद् में इनकी भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु अनुसूचित जाति के लिए 195 एवं अनुसूचित जनजाति के लिए 13 पद आरक्षित है। 

    शिक्षा से लेकर आर्थिक स्वावलंबन के क्षेत्र में हमारे नेता ने विभिन्न राजकीय योजनाओं के माध्यम से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अति पिछड़ा परिवारों के लिए विकास के नए आयाम बनाकर उन्हें मुख्य धारा से जोड़ने का काम किया है. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति परिवार के मेधावी बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त करने में किसी प्रकार कि आर्थिक दिक्कत न आये इस हेतु स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के अन्तर्गत वर्ष 2016 के अक्टूबर माह से अब तक 270 करोड़ राशि स्वीकृत की गई है। इसमें कुल वितरीत आवेदनों की राशि 107 करोड़ रुपये है। जिसके अंतर्गत कुल आवेदन 17657 के विरूद्ध 11573 आवेदन स्वीकृत किये जा चुके है. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्रों को शुरूआत के वर्ष 2005-06 में स्काॅलरशीप का प्रावधान जहां 32.71 करोड़ रुपये था उसके निरंतर बढ़ाते हुए वर्ष 2018 में 428 करोड़ रु॰ कर दिया गया. मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना के अन्तर्गत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जन-जाति तथा अतिपिछड़ा परिवार से आने वाले हमारे युवा साथियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बिहार के कुल 8386 पंचायतों में प्रति पंचायत पाँच लाभार्थियों का चयन कर कुल 41930 लोगों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया. अभी तक कुल 27005 लोग इससे लाभान्वित हो चुके है. जिनमें अनुसूचित जाति के 14605, अतिपिछड़ा से 11168 तथा अनुसूचित जन-जाति से 1232 लाभार्थी शामिल है. 

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