शारदीय नवरात्रः मां कालरात्रि को समर्पित है सप्तमी तिथि, पूजा के पश्चात देशभर के पूजा पंडालों के खुले पट, माता ने दिए दर्शन

शारदीय नवरात्रः मां कालरात्रि को समर्पित है सप्तमी तिथि, पूजा के पश्चात देशभर के पूजा पंडालों के खुले पट, माता ने दिए दर्शन

N4N DESK: या देवी सर्वभू‍तेषु माँकालरात्रिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं। माता रानी आप सभी पर अपनी विशेष कृपा बनाएं रखें। आज नवरात्रि का सातवां दिन है। आज का दिन मां कालरात्रि को समर्पित है। मां की पूजा-आराधना कर भक्तों को सुख-शांति औऱ सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

नवरात्रि में आज का दिन भक्तों के लिए बेहद ही खास होता है। सप्तमी तिथि को देशभर के पूजा पंडालों के पट खुल जाते हैं और मां अपने भक्तों को दर्शन देती हैं। इसी वजह से आज के दिन का सभी को इंतजार रहता है। इसके अलावा बात करेंगे बांग्ला पद्धति की, जिसमें पष्ठी के दिन ही बोधन से मां का आह्वान किया जाता है। सप्तमी को अधिवास होता है। जिसमें मां को पूरे विधि-विधान के साथ आमंत्रित किया जाता है। इस मौके पर ढाकवादन का खास आकर्षण रहता है। इसके बाद सप्तमी से नवमी तक हर दिन मां दुर्गा की पूजा, आरती आदि ढाक की मधुर धुनों के बीच ही होती है, जिससे माहौल भक्तिमय बना रहता है। आज से तीन दिनों तक सभी जगह चकाचौंध और मेले जैसा माहौल रहेगा। कोरोना गाइडलाइंस का पालन करते हुए लोग सभी पूजा पंडालों में माता रानी के दर्शन करेंगे एवं आशीर्वाद लेंगे।

मां बगलामुखी

शास्त्रों में मां कालरात्रि को संकटों और विघ्न को दूर करने वाली देवी माना गया है। इसके साथ ही मां कालरात्रि को शत्रु और दुष्टों का संहार करने वाला भी बताया गया है। नवरात्रि में मां कालरात्रि की पूजा करने से तनाव, अज्ञात भय और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। मां कालरात्रि का रंग कृष्ण वर्ण है.। कृष्ण वर्ण के कारण ही इन्हें कालरात्रि कहा जाता है। मां कालरात्रि की 4 भुजाएं हैं। पौराणिक कथा के अनुसार असुरों के राजा रक्तबीज का संहार करने के लिए दुर्गा मां ने मां कालरात्रि का रूप लिया था। मां के पूजन से रोग-शोक-कष्टों का निवारण होता है, औऱ मां की कृपा सभी पर बनी रहती है।

मां विन्ध्यवासिनी

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