जीतन राम मांझी से बन्द कमरे 12 मिनट तेजप्रताप यादव की बातचीत से क्या खुलेगा तेजस्वी यादव के सीएम बनने का दरवाजा

जीतन राम मांझी से बन्द कमरे 12 मिनट तेजप्रताप यादव की बातचीत से क्या खुलेगा तेजस्वी यादव के सीएम बनने का दरवाजा

PATNA :  हम सुप्रीमो जीतन राम मांझी और लालू के बड़े लाल तेज प्रताप यादव के बीच बंद कमरे में 12 मिनट की बातचीत अपने बिहार की सियासत में एक बड़ा गुल खिला दिया है। तेज प्रताप यादव और जीतन राम मांझी के बीच बातचीत क्या कोई अनायास था? या फिर तेज प्रताप यादव को लालू प्रसाद ने अपना दूत बनाकर जीतन राम मांझी के पास भेजा था। बड़ा सवाल यह है कि कुछ ही दिन पहले जीतन राम मांझी पर कई तरह के तीखे कमेंट देने वाले तेज प्रताप यादव आखिर लालू यादव के जन्मदिन पर अचानक मांझी के दरवाजे क्यों पहुंचे? इसका सीधा मतलब है हर कीमत पर बिहार की गद्दी पर तेजस्वी यादव को बैठाना। 

राजद सुप्रीमो लालू इस सपने को साकार करने के लिए जेल से फिर अस्पताल से अब बेल मिलने के बाद अपनी बड़ी बेटी मीसा भारती के घर से सियासत की नई चाल लगातार चलने में लगे हैं।  इसी सियासी चाल का एक हिस्सा था तेज प्रताप यादव का जीतन राम मांझी के आवास पर पहुंचना और बंद कमरे में 12 मिनट तक बातचीत करना। यह आसानी से समझा जा सकता है की तेज प्रताप यादव और जीतन राम मांझी के बीच क्या बातचीत हुई होगी या फिर तेज प्रताप यादव नहीं जीतन राम मांझी को किससे बातचीत करवाया होगा किन मुद्दों पर बात हुई होगी यह भी स्वाभाविक ढंग से समझे जाने वाली बात है। 

गौरतलब है कि एक तरफ बीजेपी-जेडीयू अपने अपने एजे एजेंडों को लेकर  टकराव जोरों पर है तो दूसरी तरफ एनडीए के अहम हिस्सा हम पार्टी के सुप्रीमो जीतन राम मांझी भी अपना असंतोष कई दफा जाहिर कर चुके हैं। यहां तक कि कुछ दिन पहले उन्होंने स्पष्ट कहा था कि हमारी पार्टी से एक और एमएलसी बनाया जाना चाहिए लेकिन जब उनकी यह मांग पूरी नहीं हुई तो उन्होंने नीतीश को अपना नेता बनाते बताते हुए इस बात से कन्नी काट ली थी । लेकिन इसकी तीस रह रहकर उनके कलेजे में उठते रहती है। सियासत के जानकार मानते हैं सबको पता है मांझी  की महत्वकांक्षी आजकल अपने चरम पर है। खबरों में बने रहने का हुनर जीतन राम मांझी खूब जानते हैं। यही कारण है कि गाहे-बगाहे जानबूझकर मांझी कुछ ऐसा बोल जाते हैं ताकि उनकी महत्वाकांक्षा का महत्व बना रहे। नीतीश सरकार बनाने में मांझी की भूमिका किसी से छिपी नहीं है। 

बिहार के सियासी गणित की नाजुकता भी सबको पता है। इस स्थिति में मांझी बारगेन तो कर ही सकते हैं हालांकि सियासी बारगेनिंग  एक सगल बन गया है जिसका इस्तेमाल राजनीति के बिसात पर बरसों से होता रहा है। जिस अंकगणित पर नीतीश कुमार की सरकार कायम है उसके आधार में मानसी की भूमिका बेहद अहम है मांझी का मन ढोलना नीतीश कुमार के लिए भारी पड़ सकता है 43 सीट पाकर मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार किसी कीमत पर मांझी को खोना नहीं चाहेंगे। लेकिन लालू के दूत बनकर आये तेज प्रताप ने हम सुप्रीमो जीता राम मांझी से बन्द कमरे में 12 मिनट बातचीत कर तेजस्वी के लिये सीएम पद का दरवाजा खोलने में एक बार फिर से जोर लगा दिया है। लालू यादव भी हर कीमत पर यही चाहते हैं। कहा जाता है जहां आग होती है धुंआ भी वहीं से उठता है।

कौशलेंद्र प्रियदर्शी के कलम से


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