हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए केस सूचीबद्ध नहीं करने का चल रहा है खेल, सुप्रीम कोर्ट की तरफ रूख कर रहे हैं फरीयादी

हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए केस सूचीबद्ध नहीं करने का चल रहा है खेल, सुप्रीम कोर्ट की तरफ रूख कर रहे हैं फरीयादी

PATNA : पटना हाईकोर्ट को लेकर एक ऐसी बात सामने आई है, जो उसकी छवि को खराब कर रहे हैं। यहां  पटना हाई कोर्ट के समक्ष आग्रह किये जाने के बावजूद मुकदमें को सुनवाई हेतु सूचीबद्ध नहीं किये जाने  पर याचिकाकर्तागण अपने मामले को जल्द सुनवाई हेतु सुप्रीम कोर्ट के समक्ष ले जा रहे हैं। फिर सुप्रीम कोर्ट द्वारा  ऐसे मामले को जल्द सुनवाई हेतु  पटना हाई कोर्ट के समक्ष भेजा जा रहा है। 

 ऐसे ही एक मामले में याचिकाकर्ता ओम प्रकाश धनुका व अन्य के मामले में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष बताया कि अग्रिम जमानत हेतु याचिका ,जो कि पटना हाई कोर्ट के समक्ष 21 दिसंबर, 2020 को दाखिल की गई थी, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता द्वारा  बार- बार आग्रह किये जाने के बावजूद पटना हाई कोर्ट के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध  नहीं हो सका। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट से इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर एक सप्ताह में निष्पादित करने का आग्रह किया गया है।

 इसी प्रकार से याचिकाकर्ता राजेेेश कुमार के मामले में आदेश की तिथि से, प्राथमिकता देते हुए, तीन सप्ताह के भीतर अग्रिम जमानत की याचिका पर  पटना हाई कोर्ट को विचार करने  को कहा गया है। याचिककर्ता मेसर्स कामलादित्या कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के मामले में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष  पटना हाई कोर्ट के सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा कि पटना हाई कोर्ट फिलहाल सिर्फ अत्यावश्यक मामलों की ही सुनवाई कर रहा है, इसलिए मेरे मामले को सुनवाई हेतु सूचीबद्ध नहीं किया गया। इस मामले में याचिकाकर्ता को 10 वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इसे भी सुप्रीम कोर्ट ने शीघ्र सुनवाई करने का आग्रह किया।

पिछले साल भी आई थी ऐसी ही शिकायतें

बता दें कि इसी तरह का मामला पिछले साल की शुरुआत में भी सामने आया था। बताया गया कि केस सूचिबद्ध नहीं किए जाने को लेकर उस समय अधिवक्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश के न्यायकक्ष में जाकर खंडपीठ से अपनी पीड़ा का इजहार किया।सभी मामलों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने को लेकर कई सुझाव भी दिए। मुख्य न्यायाधीश को यह भी बताया गया कि कोई एक न्यायाधीश हर तरह के केस की त्वरित गति से सुनवाई करते हुए मामलों को जल्दी निष्पादित कर ही देंगे।मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वकील यदि कुछ सुझाव देते हैं तो उन पर विचार किया जाएगा। लेकिन डेढ़ साल का समय गुजरने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है

बहरहाल, जिस तरह से केसों को सूचीबद्ध किए जाने को लेकर हाईकोर्ट में मनमाने ढंग से काम किया जा रहा है, उसमें आवश्यक सुधार की जरुरत है, ताकि कानून से न्याय मांगनेवालों को भटकना न पड़े।

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