भय के माहौल से मुक्ति मिली तो शिक्षा के लिए जागरुक हुए गंगा दियारा के लोग, लेकिन सरकारी व्यवस्था ने कर दिया सबको निराश

भय के माहौल से मुक्ति मिली तो शिक्षा के लिए जागरुक हुए गंगा दियारा के लोग, लेकिन सरकारी व्यवस्था ने कर दिया सबको निराश

KATIHAR : अपराध की दुनिया से तौबा करते हुए कटिहार अमदाबाद प्रखंड के गंगा दियारा इलाके के लोग अब अपने आने वाले कल के भविष्य को लेकर सजग दिख रहे है, इसलिए कभी गोली बंदूक और खूनी खेल के लिए पहचान वाले दियारा में लोग अब बच्चों के लिए शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग कर रहे हैं मगर शिक्षा विभाग से इन लोगों को मायूसी हाथ लग रही है, जो यहां के लोगों में देखी जा सकती है।  

बिहार-झारखंड और बंगाल से जुड़े कटिहार अमदाबाद प्रखंड के चौकिया पहाड़पुर पंचायत स्थित गदाई दियारा की पहचान कभी अपराध के बोलबाला के लिए हुआ करता था मगर धीरे-धीरे यहां के मजदूर और किसान अपने आने वाले पीढ़ी के भविष्य को लेकर शिक्षा के प्रति आकर्षित होने लगे थे। मगर शिक्षा विभाग के रवैया से एक बार फिर ये इलाका अशिक्षा के अंधकार में डूबने के कगार पर है। 

जो संपन्न वह प्राइवेट स्कूलों में भेज रहे हैं बच्चों को

बिहार, प.बंगाल और झारखंड की सीमा पर स्थित गदाई दियारा में पिछले कुछ सालों से भय के माहौल की जगह बच्चों को शिक्षित पर जोर दिया जा रहा है। यहां रहनेवाले अधिक संपन्न लोग अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेज रहे हैं.  लेकिन गरीब और किसान के बच्चे अब भी सरकारी व्यवस्था पर निर्भर हैं। जिनके लिए यह स्कूल ही सबसे शिक्षा का बड़ा केंद्र है।

स्कूल खुला, लेकिन नहीं आते शिक्षक

ग्रामीणों की माने तो लोगों में शिक्षा का अलख जगाने के लिए इलाके में प्राथमिक विद्यालय गदाई दियारा गोपालपुर में स्थापित किया गया था मगर तब से लेकर अब तक शिक्षक नहीं आने की शिकायत है। ग्रामीण कहते हैं किस इलाके में सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी को रस्म अदायगी के लिए शिक्षक आते हैं, इन लोगों ने इस हालात में सुधार करने के लिए कई जगह शिकायत भी किया है। मगर शिक्षक के रसूख के सामने व्यवस्था बेबस दिख रहा है। इस बीच चौंकाने वाला एक और तथ्य यह है कि वैसे तो विद्यालय संचालित हो ही नहीं रहा है। मगर बच्चों के लिए मिड-डे मिल का आंकड़ा बिल्कुल दुरुस्त है। जिसमें स्थानीय ग्रामीण सवाल उठाते हुए व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग कर रहे हैं।

 शिक्षा पदाधिकारी कामेश्वर प्रसाद गुप्ता से जब इस पर बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह मेरे संज्ञान में नहीं आया था। अब जब इसकी जानकारी मिली है तो मैं निश्चित करुंगा कि यहां के स्कूल में नियमित रूप से शिक्षक पहुंचे। अगर शिक्षक नहीं जाएंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  उन्होंने कहा निश्चित तौर पर विद्यालय चाहे जहां भी स्थापित हो वहां तक शिक्षकों को पहुंचना अनिवार्य है, उन्होंने आश्वस्त किया इस मामले को जरूर देखा जाएगा।


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