अफसरशाही से तंग है त्रिस्तरीय जनप्रतिनिधि, जोप अध्यक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर डीआरडीए व पंचायतीराज विभाग पर लगाए गंभीर आरोप

अफसरशाही से तंग है त्रिस्तरीय जनप्रतिनिधि, जोप अध्यक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर डीआरडीए व पंचायतीराज विभाग पर लगाए गंभीर आरोप

MOTIHARI : जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, पूर्वी चम्पारण पर मनमाने तरीके से पदाधिकारियो का कब्जा।मोतिहारी अध्यक्ष जिला परिषद् ममता राय ने प्रेस वार्त्ता करते हुए कहा की जिला ग्रामीण विकास अभिकरण को पदाधिकारियो द्वारा दबोच लिया गया है। उन्होने कहा की जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के मार्गदर्शिका 5.2 में स्पष्ट है कि जिला ग्रामीण विकास अभिकरण का प्रशासन शाशी निकाय द्वारा संचालित होगा तथा शाशी निकाय का अध्यक्ष, जिला परिषद अध्यक्ष होंगे। 

जीप अध्यक्ष राय ने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव ने भी अपने पत्रांक- 1403, दिनांक- 02.03.2009 द्वारा स्पष्ट किया है कि अध्यक्ष, जिला परिषद्, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के अध्यक्ष हैं और उन्हे जिला ग्रामीण विकास अभिकरण द्वारा संचालित सभी योजनाओ की समीक्षा एवं निगरानी करनी है। इतना ही नही मुख्य सचिव, बिहार सरकार द्वारा ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार के आदेश ज्ञापांक- 1273, दिनांक- 22.03.2005 में स्पष्ट आदेश निर्गत है कि ग्रामीण विकास विभाग का अध्यक्ष अब जिलाधिकारी के बजाय अध्यक्ष जिला परिषद् होगा और अध्यक्ष के नाते जिन शक्तियो एवं सुविधाओ का उपयोग जिलाधिकारी द्वारा किया जा रहा था अब उन सभी का उपयोग जिला परिषद् अध्यक्ष द्वारा किया जायेगा। बावजूद इसके प्रशासन मौन धारण किया हुआ है। 

माननीय अध्यक्ष ने दो पत्र शाशी निकाय के बैठक हेतु दिया लेकिन जिला ग्रमीण विकास अभिकरण के प्रशासन द्वारा न कोई कार्रवाई की गई और न ही कृत कार्रवाई से अध्यक्ष, जिला परिषद् को अवगत कराया गया। इससे स्पष्ट होता है कि पंचायती राज संस्थाओ को दरकिनार कर प्रशासन समानान्तर सत्ता चलाना चाहती है जो बिलकुल नियम के विपरीत है। बहुत जदोजेहाद के बाद  प्रशासन द्वारा भारत सरकार के ग्रामीण विकास विभाग अनुभाग द्वारा पत्र उपलब्ध कराया गया जिस पत्र में स्पष्ट है कि जिला ग्रमीण विकास अभिकरण में जो भी फंड अवशेष है उन्हे दिनांक- 31.03.2022 तक जिला परिषद् के खाते में हस्तान्तरित किया जाना है, फिर भी कोई भी राशि प्रशासन द्वारा न जिला परिषद् को हस्तान्तरण कराया गया और न विलय के मामले में कोई कार्रवाई की गयी।

पुनः माननीय अध्यक्ष ने अपने पत्रांक- 28, दिनांक- 17.02.2022 द्वारा उप विकास आयुक्त पूर्वी चम्पारण को पत्र देकर पृच्छा किया कि जब 31.03.2022 तक ग्रामीण विकास विभाग की सभी राशि जिला परिषद् में हस्तान्तरण कर दिया जाना था और 01.04.2022 से विभाग अस्तित्व विहीन हो गया तो किस परिस्थिति में संचित राशि का व्यय किया जा रहा है।

 इस संबंध में भी उनके द्वारा कोई उत्तर नही दिया गया जिससे परिलक्षित होता है कि पंचायती राज संस्थाओ को दरकिनार कर उन्हे कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही मनरेगा योजना की वार्षिक सूची वर्ष 2022-23 की अनुमोदन जिला परिषद् द्वारा किया जाना है लेकिन विभाग द्वारा मागदर्शिका के विपरीत कार्ययोजना भेजी गई थी और उन्हे सुधार विभाग में भेजा गया। परन्तु आज तक उन योजनाओ का अनुमोदन हेतु नहीं भेजा गया और मागदर्शिका के विपरीत विभाग के पदाधिकारियो एवं कर्मीयो के मिली भगत से योजनाओ का कार्यान्वयन अनियमित तरीके से कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र

इस संबंध में माननीय अध्यक्ष जिला परिषद् द्वारा स्थानीय विधायक प्रमोद कुमार जी को अवगत कराया और उन्होने इस घोर वित्तीय अनियमितता के विषय में माननीय मुख्यमंत्री, माननीय मंत्री ग्रामीण विकास विभाग, माननीय मंत्री पंचायती राज विभाग, बिहार सरकार, मुख्य सचिव, बिहार सरकार, प्रधान सचिव, ग्रामीण विकास विभाग एवं प्रधान सचिव पंचायती राज विभाग को आवश्यक कार्रवाई हेतु पत्र के माध्यम से सूचित किया गया। 

श्रीमति राय ने यह भी कहा कि सरकार “न्याय के साथ विकास चाहती है“ पर कुछ पदाधिकारियो के कारण पंचायती राज के शक्तियो को अघात पहुंचाया जा रहा है। उन्होने वैसे पदाधिकरियो/ कर्मियो को सचेत करते हुए कहां कि उनका पदस्थापन जिन कार्यो के लिए हुआ है वे राजनीति छोड़कर सरकार के दिशा निर्देशो का पालन करे अन्यथा उनके उच्चाधिकारी को पंचायती राज संस्थाओ के अधिकारो के अतिक्रमण के संबंध में संसुचित करते हुए माननीय उच्च न्यायालय की शरण ली जायेगी एवं आन्दोलन भी किया जायेगा

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