इस अंतरिक्ष यात्री ने पहली बार चांद पर उतारा था यान, 90 साल की आयु में ली आखिरी सांस

इस अंतरिक्ष यात्री ने पहली बार चांद पर उतारा था यान, 90 साल की आयु में ली आखिरी सांस

DESK : चांद पर पहली बार कदम रखने की बात होती है तो सबसे पहले नील आम्रस्ट्रांग और एडविन ऑल्ड्रिन का नाम सामने आता है। लेकिन इस मिशन में चांद पर पहुंचने वाले वह सिर्फ वह दोनों नहीं थे, उनके साथ एक तीसरा शख्स भी उस समय चांद पर मौजूद था, जो उस समय अपोलो 11 यान में मौजूद था। उस अंतरिक्ष यात्री का नाम है माइकल कॉलिंस। जिनका कल 90 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।

नासा के लिए चांद पर मानव यान उतारन आज भी एक आश्चर्य की तरह माना जाता है। इस आश्चर्य को सच किया था माइकल कॉलिंस ने। अभियान के दौरान माइकल कॉलिंस का एकमात्र उद्देश्य यही था कि सफलतापूर्वक अपोलो-11 को चांद की सतह पर उतारें और इसके बाद नील और बज को लेकर वापस धरती पर आ सकें। अपोलो-11 से निकलकर चांद तक जिस मॉड्यूल में नील और बज गए थे, उसका नाम द ईगल था। बता दें कि तीनों के लिए चांद की यात्रा आसान नहीं थी।

सबसे मुश्किल था चांद पर उतरना

बताया जाता है कि यात्रा शुरू होते ही अपोलो 11 का धरती से रेडियो संपर्क टूट गया, इसके बाद कंप्यूटर में ग्लिच आ गया और द ईगल में ईंधन की कमी भी हो गई। इन सबके बीच माइकल लगातार यान को कंट्रोल करने की कोशिश करते रहे और आखिरकार यान को चांद की सतह पर उतारने में कामयाबी हासिल। इसके बाद जो हुआ, वह इतिहास में शामिल हो गया।

नील और एल्ड्रिन सतह पर, यान में चक्कर लगा रहे थे माइकल

एक तरफ जहां इनके दोनों साथी चांद पर चहलकदमी कर रहे थे तो वहीं माइकल कॉलिंस यान के साथ चांद का चक्कर लगा रहे थे। स्टीव का कहना है कि माइकल कॉलिंस की वजह से ही नील और बज सुरक्षित धरती पर वापस आए थे। माइकल कॉलिंस के पोते का बयान आया कि उनके दादाजी ने बहादुरी से कैंसर के खिलाफ जंग लड़ी लेकिन अंत में हार गए।नासा की तरफ से उनके निधन पर शोक जाहिर किया गया है।

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