विपक्ष के भारी विरोध के बीच संसद में तीन तलाक बिल पेश, पक्ष में पड़े 186 वोट

विपक्ष के भारी विरोध के बीच संसद में तीन तलाक बिल पेश, पक्ष में पड़े 186 वोट

NEWS4NATION DESK : विपक्ष के भारी विरोध के बीच संसद में तीन तलाक बिल आज शुक्रवार को पेश हुआ। वहीं इस हुई वोटिंग में पक्ष में 186 और विपक्ष में 74 वोट पड़े। 

आज संसद सत्र की कार्रवाई शुरु होते ही कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तीन तलाक बिल को पेश करते हुए कहा कि यह मुस्लिम महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए है। जिसपर कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने इस बिल को असंवैधानिक और भेदभाव वाला बताकर विरोध किया। 

विपक्ष की आपत्ति के बाद इसे पेश किए जाने को लेकर वोटिंग हुई। जिसमें पक्ष में 186 वोट और विपक्ष में 74 वोट पड़े। 

बिल को पेश करते हुएकानून मंत्रीरविशंकर प्रसाद ने कहा कि पिछले साल दिसंबर में लोकसभा से पारित किया, राज्यसभा में पेंडिंग था। चूंकि राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त हो गया तो नई लोकसभा में संविधान की प्रक्रिया के तहत नए सिरे से नया बिल लाए हैं। वहीं इस मामले पर विपक्ष के हंगामे और इसपर बहस की मांग पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कानून पर बहस और उसकी व्याख्या अदालत में होती है, लोकसभा को अदालत मत बनाएं।
 
 रविशंकर प्रसाद बिल की जरूरत को बताते हुए कहा कि 70 साल बाद क्या संसद को नहीं सोचना चाहिए कि 3 तलाक से पीड़ित महिलाएं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी न्याय की गुहार लगा रही हैं तो क्या उन्हें न्याय नहीं मिलना चाहिए। 2017 से 543 केस तीन तलाक के आए, 239 तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आए। अध्यादेश के बाद भी 31 मामले सामने आए। इसीलिए हमारी सरकार महिलाओं के सम्मान और गरिमा के साथ है।


 इधर कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों ने इस बिल का जमकर विरोध किया। कांग्रेस सांसदशशि थरूरने बिल का विरोध करते हुए कहा कि मैं तीन तलाक का विरोध नहीं करता लेकिन यह बिल समुदाय के आधार पर भेदभाव करता है जिसकी वजह से इसका विरोध कर रहा हूं। 

थरुर ने कहा कि वे तीन तलाक को आपराधिक मामला सिर्फ मुस्लिम समुदाय ही क्यों ? किसी भी समुदाय की महिला को अगर पति छोड़ता है तो उसे आपराधिक क्यों नहीं बनाया जाना चाहिए। सिर्फ मुस्लिम पतियों को सजा के दायरे में लाना गलत है। यह समुदाय के आधार पर भेदभाव है जो संविधान के खिलाफ है।' 

 वहीं AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने तीन तलाक बिल संविधान के आर्टिकल 14 और 15 का उल्लंघन बताकर विरोध किया। ओवैसी ने बिल को मुस्लिमों के साथ भेदभाव करने वाला बताया। AIMIM सांसद ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि एक बार में तीन तलाक से शादी खत्म नहीं हो सकती। अगर किसी नॉन-मुस्लिम पति पर केस हो तो उसे एक साल की सजा, लेकिन मुस्लिम पति को 3 साल की सजा। यह भेदभाव संविधान के खिलाफ है। यह महिलाओं के हितों के खिलाफ है।' ओवैसी ने सवाल किया कि अगर पति जेल में रहा तो महिलाओं को मैंटिनंस कौन देगा? क्या सरकार देगी।

 

 

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