डूबते-बचते महावत को लेकर गंगा पार किया गजराज, तेज धारा से जंग लड़ते वीडियो वायरल

डूबते-बचते महावत को लेकर गंगा पार किया गजराज, तेज धारा से जंग लड़ते वीडियो वायरल

वैशाली. गंगा की तेज उफनती धार के बीच हाथी और उस पर बैठे महावत का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो रोमांच से भरे महावत और हाथी के द्वारा नदी की तेज धार से की जा रही जंग और फिर जीत को दर्शाता है। वायरल वीडियो में साफ तौर से दिखाई दे रहा है कि किस तरह अपने महावत को लेकर जा रहा हाथी नदी की तेज धार में घाट किनारे जाने का प्रयास कर रहा है। पानी की धारा कभी इतनी तेज होती है कि कई बार ऐसा लगता है जैसे हाथी नदी में डूब गया हो, लेकिन हर बार हाथी फिर से नदी के जल स्तर से ऊपर आ जाता है। हांलाकि इस वीडियो की पुष्टि न्यूज4नेशन नहीं करता है।

कई प्रयासों के बाद नदी की धारा के विपरीत हाथी अपने ऊपर बैठे महावत के साथ नदी पार करने के प्रयास में सफल हो जाता है। यह वाक्य इतना रोमांचक है कि घाट किनारे के लोग मोबाइल पर का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं। बताया गया कि राघोपुर थाना क्षेत्र के रुस्तमपुर घाट से पटना जेठूई घाट की ओर जाने के लिए हाथी पर सवार होकर महावत ने उसे गंगा नदी में उतारा था, लेकिन जैसे ही हाथी नदी को पार करने के दौरान धाराओं के बीच गया, वैसे ही हाथी डूबने लगा। वीडियो में ऐसा लग रहा है कि जैसे हाथी अब धाराओं के बीच डूब जाएगा, लेकिन फिर चंद सेकंड के बाद ही हाथी तैरता हुआ नदी से बाहर निकल आता है और इस दौरान हाथी के ऊपर बैठा महावत भी कुशलता का अद्भुत परिचय देते हुए हाथी के ऊपर तब भी बैठा हुआ ही रहता है, जब हाथी पूरी तरह पानी के अंदर नजर आ रहा होता है।

गंगा नदी की तेज धारा और महावत के साथ हाथी के नदी पार करने का या अद्भुत दृश्य है। खासकर तब जब गंडक नदी में बाल्मीकि बराज छोड़े गए पानी के कारण गंगा नदी में भी धारा तेज उफान पर है। हाजीपुर कोनहारा घाट के पास गंडक और गंगा किस संगम स्थल है। यहां मिलकर गंडक के पानी गंगा में समाहित हो जाती है। पानी गंगा नदी में इतना बढ़ जाता है कि पटना से राघोपुर को जोड़ने वाला पीपा पुल हटा दिया जाता है। इन हालातों में लोग जान जोखिम में डाल कर नाव से नदी पार करते हैं। महावत के साथ हाथी रुस्तमपुर घाट से जेठूई घाट पटना की ओर जाने के लिए गंगा नदी में घुसा था। 

यह वीडियो मंगलवार का बताया जा रहा है। जब हाथी नदी को तैरकर पार कर रहा था, तब नदी में पानी थोड़ी कम थी, लेकिन अचानक ही पानी बढ़ जाने पर हाथी नदी की तेज धारा में बहन लगा था। लगभग एक किलोमीटर इस सफर में कई बार ऐसा लगा कि हाथी नदी की तेज धारा बह जाएगा, लेकिन हाथी ने न सिर्फ अपनी जान बचाई, बल्कि अपने महावत को भी सकुशल नदी के उस पार पहुंचा दिया। इस पूरी प्रक्रिया में महावत की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण नजर आई। बगैर अपना धैर्य खोए हुए महावत लगातार हाथी पर सवार रहा। कभी उसके कान को पकड़कर उसने संतुलन बनाया तो कभी उसके गले में पैर फंसा कर। लेकिन इस तरह दोनों ने गंगा नदी की तेज धारा को पार किया।

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