योगी आदित्यनाथ जब पैदा हुए तब मंजूर हुई परियोजना अब उनके सीएम बनने पर हुई पूरी

योगी आदित्यनाथ जब पैदा हुए तब मंजूर हुई परियोजना अब उनके सीएम बनने पर हुई पूरी

लखनऊ. यूपी के बलरामपुर में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरयू-राप्ती मुख्य नहर परियोजना का शुभारंभ किया. 9 हजार 800 करोड़ रुपये की लागत से तैयार नहर परियोजना को लेकर अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की पूर्ववर्ती सरकारों पर तंज कसा है. 

उन्होंने कहा, 1972 में स्वीकृत हुई परियोजना अब 2021 में पूरी हो रही है. यानी जिस वर्ष योगी का जन्म हुआ उस साल मंजूर परियोजना को पूर्ण होने में करीब पचास साल लग लग गए. योगी ने पीएम मोदी की तारीफ की कि उन्होंने इस परियोजना को प्राथमिकता दी जिस कारण इसके निर्माण में तेजी आई और अब यह यूपी की किस्मत बदलने वाला साबित होगा. लोकार्पण कार्यक्रम में पीएम मोदी के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी मौजूद रहे. 

वहीं पीएम मोदी ने कहा, पहले जो सरकार में थे- वो माफिया को संरक्षण देते थे। आज योगी जी की सरकार, माफिया की सफाई में जुटी है। तभी तो यूपी के लोग कहते हैं- फर्क साफ है:पहले जो सरकार में थे- वो बाहुबलियों को बढ़ाते थे। आज योगी जी की सरकार गरीब, दलित, पिछड़े और आदिवासी, सभी को सशक्त करने में जुटी है। तभी तो यूपी के लोग कहते हैं- फर्क साफ है. उन्होंने कहा, सरयू नहर परियोजना में जितना काम 5 दशक में हो पाया था, उससे ज्यादा काम हमने 5 साल से पहले करके दिखाया है। यही डबल इंजन की सरकार है। यही डबल इंजन की सरकार के काम की रफ्तार है: जब इस परियोजना पर काम शुरू हुआ था, तो इसकी लागत 100 करोड़ रुपए से भी कम थी। आज ये लगभग 10 हज़ार करोड़ रुपए खर्च करने के बाद पूरी हुई है।

मोदी ने कहा कि पहले ही सरकारों की लापरवाही की 100 गुना ज्यादा कीमत देश को चुकानी पड़ी है: देश की नदियों के जल के सदुपयोग हो, किसानों के खेत तक पर्याप्त पानी पहुंचे, ये सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना का पूरा होना इस बात का सबूत है कि जब सोच ईमानदार होती है, तो काम भी दमदार होता है:

सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना से किसानों को 14 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सुविधा मिलेगी. सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना 9800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाई गई है, जिसमें से 4600 करोड़ रुपए पिछले 4 वर्षों में प्रावधान किए गए थे। इसमें क्षेत्र के जल संसाधनों का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए 5 नदियों- घाघरा, सरयू, राप्ती, बाणगंगा और रोहिणी को आपस में जोड़ना भी शामिल है.

परियोजना से 14 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई के लिए पानी सुनिश्चितता होगी. साथ ही 6200 से अधिक गांवों के लगभग 29 लाख किसान लाभान्वित होंगे. खासकर पूर्वी यूपी के 9 जिलों बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संत कबीर नगर, गोरखपुर और महाराजगंज को इससे बड़ा फायदा होगा. 

उत्तरप्रदेश में अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव के पूर्व पीएम मोदी द्वारा इसका उद्घाटन करना पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक बड़ा चुनावी गेम भी माना जा रहा है. आगामी चुनाव में इस परियोजना की खूबियाँ गिनाकर पार्टी फायदा उठाने की कोशिश करती दिख सकती है.

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