6 करोड़ में कौन-कौन थे हिस्सेदार...सिर पर किसका हाथ? 'रिश्वतखोर' इंजीनियर के यहां मिले नकदी की गिनती में लगे 'चार' मशीन, झोला में पैसा भरकर भाग रहे लोगों को खदेड़कर पकड़ा

6 करोड़ में कौन-कौन थे हिस्सेदार...सिर पर किसका हाथ? 'रिश्वतखोर' इंजीनियर के यहां मिले नकदी की गिनती में लगे 'चार' मशीन, झोला में पैसा भरकर भाग रहे लोगों को खदेड़कर पकड़ा

PATNA: बिहार में भ्रष्‍ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है. निगरानी ब्यूरो की टीम आज सुबह से ही ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता के ठिकानों पर छापेमारी में जुटी है। किशनगंज से लेकर पटना तक जांच टीम के अधिकारी छापेमारी में जुटे हैं. रेड में इतने नोट मिले हैं कि चार-चार मशीनों से गिनती की जा रही है। छापेमारी की भनक मिलते ही नोटों से भरा बैग लेकर भाग रहे दो लोगों को निगरानी टीम ने खदेड़कर पकड़ा। पकड़ाने पर बैग से साठ लाख रू नकद मिले। शाम तक नोटों की गिनती पूरी होने पर कुल नकद पांच करोड़ से अधिक 6 करोड़ तक पहुंच सकती है। 

पैसा लेकर भाग रहे 2 लोगों को खदेड़कर पकड़ा 

निगरानी ब्यूरो की तरफ से बताया गया है कि ग्रामीण कार्य विभाग के किशनगंज प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता संजय कुमार राय के किशनगंज और पटना के ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। निगरानी टीम जब किशनगंज में छापेमारी करने पहुंची तो पता चला कि यह भ्रष्ट इंजीनियर अपने जूनियर इंजीनियर और कैशियर के यहां रिश्वत का पैसा रखता है। इसके बाद जांच टीम ने इन लोगों के यहां भी दबिश दी। किशनगंज से करीब चार करोड़ से अधिक रू बरामद हो चुके हैं। वहीं कार्यपालक अभियंता संजय कुमार राय के पटना आवास की तलाशी में लगभग 1 करोड़ रू से अधिक नकद मिले हैं। जांच टीम नोटों के मिलान में जुट गई है। छापेमारी में कई अन्य कागजात भी मिले हैं। बैंक लॉकर का भी पता चला है। इसके अलावे जमीन के के कागजात व अन्य सबूत मिले हैं। किशनगंज में कार्यपालक अभियंता के एक निजी फ्लैट जिसे एक ठेकेदार के नाम रखा गया है, जैसे ही छापेमारी की भनक मिली उसमें ताला बंद कर फरार हो गया। अब मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में ताला खोल कर सर्च किया जायेगा। 

नोटों की गिनती में चार मशीनें 

निगरानी ब्यूरो ने कार्यपालक अभियंता के पटना रूपसपुर आवास से करीब सवा करोड़ नकद मिले हैं. वहीं कैशियर के पटना के अनिसाबाद आवास से साठ लाख नकद मिले हैं. जबकि किशनगंज स्थित जूनियर इंजीनियर आवास से करीब 4 करोड़ नकद मिलने की खबर है। किशनगंज में 2 मशीन से नोटों का मिलान किया जा रहा है। जबकि पटना के 2 जगहों पर 2 मशीन से नोटों की गिनती की जा रही है। 

बड़ा सवाल यही है कि इस भ्रष्ट इंजीनियर के सिर पर किसका हाथ है? क्या एक इंजीनियर बिना ऊपरी पहुंच के इतने बड़े स्तर पर उगाही कर सकता है? रिश्वत के इस पैसे का किनके बीच बंटवारा होना था, या फिर बंटवारे के बाद यह पैसा भ्रष्ट इंजीनियर-जूनियर इंजीनियर और कैशियर के हिस्से में मिला था? ये तमाम सवाल उठना लाजिमी है,क्यों कि बिना उपरी मिलीभगत या संरक्षण मिले कोई अधिकारी इतना बड़ा धनकुबेर नहीं बन सकता. 



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