पंचकोसी मेला का समापन : बक्सर में ताड़का वध के बाद भगवान राम ने की थी 5 जगहों की यात्रा, अंतिम दिन खाया था लिट्टी चोखा

पंचकोसी मेला का समापन : बक्सर में ताड़का वध के बाद भगवान राम ने की थी 5 जगहों की यात्रा, अंतिम दिन खाया था लिट्टी चोखा

BUXAR : विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक पंचकोशी मेला को लेकर विश्वामित्र की नगरी जिसे मिनी काशी भी कहा जाता है। जहां 24 नवंबर से इसकी शुरुआत होकर आज 28 नवंबर को अंतिम पांचवा पड़ाव पर समाप्ति होता है। यहां श्रद्धालुओं का कल रात से ही आने का ताता लगा हुआ है। देश सहित नेपाल के अलावे दूरदराज क्षेत्रों से भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ऐसी मान्यता है कि गंगा में स्नान कर मंदिरों में पूजा अर्चना करने के बाद लिट्टी चोखा लगाकर प्रसाद के रूप में इसे ग्रहण करते हैं। गंगा नदी से सटे चरित्रवन सहित किला मैदान में श्रद्धालुओं से भरा पड़ा दिख रहा है। पंचकोशी के अवसर पर बक्सर में लिट्टी चोखा भोज का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने खुद उपला लाकर या खरीद कर लिट्टी लगाकर प्रसाद ग्रहण किया, वहीं दूसरों के बीच भी प्रसाद ग्रहण कराया।

बताते चलें कि किला मैदान से लेकर बक्सर के अन्य इलाकों में लिट्टी चोखा बनाकर बक्सर पहुंचे श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। किला मैदान का ऐसा नजारा देखने को मिला जहां मानों आंसमान धुएँ- धुएं से भर गया हो। इसके अलावा शहर के हर घर में लिट्टी-चोखा की तैयारी हो रही है। चरित्रवन के त्रिदंडी स्वामी आश्रम के समीप संस्कृत महाविद्यालय प्रांगण साहित विभिन्न जगहों में लिट्टी चोखा भोज का आयोजन किया है। रेडक्रॉस सोसाइटी से लेकर सर्किट हाउस में लिट्टी चोखा का स्पेशल आयोजन किया गया। जिला परिषद सदस्य बंटी शाही के सौजन्य से लिट्टी-चोखा भोज का आयोजन किया गया है। जहां हर समुदाय हर वर्ग पुलिस पदाधिकारी से लेकर सभी पार्टी के नेता गण एवं नवनिर्वाचित जिला परिषद सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। जहां लिट्टी चोखा की महत्ता पर संगीत गाकर लोगों का मनोरंजन भी करते देखा गया।

बक्सर पहुंचे कथावाचक जीयर स्वामी जी महाराज ने बताया कि बक्सर से ही सृष्टि की शुरुआत होती है। इसीलिए बक्सर और बक्सर की पंचकोसी परिक्रमा की महत्ता काफी बढ़ जाती है। बक्सर वह धरती है, जहां तमाम जगहों से आने के बाद यहां हर किसी की मंगल कामना हुई है। उन्होंने बताया कि पंचकोसी परिक्रमा से अपने लक्ष्य से भटका हुआ व्यक्ति भी अपने गंतव्य को प्राप्त कर लेता है। बक्सर की धरती वह ऐतिहासिक धरती है जहां भगवान बामन ने जन्म लिया। स्वामी जी ने बताया कि धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में जिस तरह से बक्सर को विकसित होना चाहिए, वह कहीं ना कहीं आज भी नहीं हो पाया है। चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने जनप्रतिनिधि और सरकारी स्तर पर उदासीनता बरते जाने को लेकर भी चिंता जाहिर की,साथ ही कहा कि इस दिशा में सभी को आगे आना चाहिए। ताकि बक्सर की धार्मिक महत्ता को और विश्व पटल पर निखारा जा सके। 

पंचकोशी यात्रा के दौरान दौरान सुरक्षा के साथ ही विधि व्यवस्था बनाएं रखने के लिए जिला प्रशासन के द्वारा रेलवे स्टेशन और किला मैदान सहित अन्य जगहों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सब्जियों की मंडी में बैंगन, टमाटर से लेकर लिट्टी चोखा भगवान के लिए दुकानें सजी थी। दरअसल ऐतिहासिक पंचकोशी परिक्रमा की परंपरा की शुरुवात भगवान राम के उस समय से शुरू होती है। जब भगवान राम तड़का का वध करने के बाद बक्सर के पांच स्थलों पर यात्रा किए थे। मान्यताओं की माने तो भगवान राम सभी पांचो जगहों पर गए। जिसमें पहला स्थान अहिरौली,  फिर नदावं, उसके बाद भभुवर और नुवांव तथा अंत में चरित्रव़न की यात्रा भगवान राम ने की थी। इन सभी स्थलों पर रात्रि विश्रा़म किया और अलग अलग भोजन ग्रहण किया। ऐसे में अंतिम दिन लिट्टी चोखा से यात्रा की समाप्ति की जाती है। जो देर शाम तक नजारा देखने को मिल रहा है। निजी वाहनों एवं रेलवे द्वारा यात्रियों का आने-जाने का सिलसिला जारी है। 

ऐतिहासिक पंचकोशी यात्रा को पांच कोस में पदयात्रा के माध्यम से घुमा जाता है। जिसमें भारत के कोने कोने से आये श्रद्धालु और साधु संत भी शामिल होते है। अहिल्या मां की पूजा के बाद यात्रा का प्रारंभ करते है। जहां हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। वहीं देर शाम पुलिस पदाधिकारियों की कमी खली,एक तरफ बरहमपुर में हो रहे पंचायत चुनाव में पुलिस प्रशासन चुनाव कराने पहुंचा है। वही बक्सर शहर के विभिन्न जगहों पर महाजाम का नजारा दिखा, खासकर सेंडी गेट से लेकर गोलंबर के चारों चौराहे जाम से कराहते रहे। पुलिस बल की कमी के वजह से घंटों का जाम रहा। सूचना के घंटों बाद पहुंचे नगर थाना प्रभारी बड़ी मशक्कत से जाम हटवा रहे हैं। जहां अभी तक जाम लगा हुआ है।


बक्सर से संजय उपाध्याय की रिपोर्ट 

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