कांग्रेस बिहार प्रभारी के बयान पर बिहार बीजेपी का पलटवार, कहा-अगर कांग्रेस की नियत है साफ है तो इन सात सवालों का जवाब दें गोहिल

कांग्रेस बिहार प्रभारी के बयान पर बिहार बीजेपी का पलटवार, कहा-अगर कांग्रेस की नियत है साफ है तो इन सात सवालों का जवाब दें गोहिल

Patna : बिहार भाजपा प्रवक्ता डॉo निखिल आनंद ने शक्ति सिंह गोहिल द्वारा सुशांत सिंह राजपूत के मसले पर राजनीति न करने की सलाह देने पर आपत्ति दर्ज करते हुए कहा है कि “शक्ति सिंह गोहिल बिहार कांग्रेस के प्रभारी है और वे खुद को बिहार की जनता का प्रभारी समझ कर ठेकेदारी न करें। 

निखिल आनंद ने कहा है कि गोहिल महाराष्ट्र सरकार का प्रवक्ता बनकर सुशांत सिंह राजपूत के मामले में राजनीति न करने की सलाह बिहार की सरकार को दे रहे हैं या फिर बिहार की जनता को। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं और बिहार के बेटे सुशांत सिंह राजपूत को न्याय दिलाने के लिए बिहार सरकार और बिहार पुलिस संकल्पित है। शक्ति सिंह गोहिल अगर बिहार की जनता के शुभचिंतक हैं तो महाराष्ट्र सरकार और कांग्रेस- शिवसेना को सुशांत मामले में राजनीति न करने की सलाह दें।“

निखिल आनंद ने शक्ति सिंह गोहिल से सुशांत सिंह राजपूत के मामले में सात (7) सवाल पूछे। निखिल ने पूछा कि उन्होंने सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी में से किसके कहने पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से बात किया? क्या वे कांग्रेस के भैया और दीदी के बॉलीवुड रिश्तों के हित में महाराष्ट्र सरकार से बात करने गए थे? 

क्या महाराष्ट्र सरकार और उसमें शामिल कांग्रेस एवं शिवसेना बॉलीवुड स्टार्स से पुराने रिश्ते निभा रही है? क्या कांग्रेस पार्टी सुशांत को न्याय के खिलाफ और साजिशकर्ताओं के पक्ष में खड़ी है? कांग्रेस पार्टी और शिवसेना सुशांत मामले में सीबीआई जाँच की माँग क्यों नहीं कर रही है? 

उन्होंने कहा है कि गोहिल का यह बयान कि महाराष्ट्र सरकार सुशांत मामले की जाँच सही दिशा में कर रही है, क्या यह बयान राजनीतिक नहीं है? फिर महाराष्ट्र सरकार और मुम्बई पुलिस की तरफ से न्याय के लिए आश्वस्त कर बिहार सरकार को अस्पताल और स्मारक बनाने की नसीहत देना, क्या राजनीतिक बयान नहीं है?

निखिल आनंद ने कहा कि जिस दिन बिहार पुलिस ने मुम्बई में जाँच शुरू की उसी दिन शक्ति सिंह गोहिल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से बातचीत का हवाला देकर आश्वस्त करते हैं कि जाँच सही दिशा में है और न्याय मिलेगा। लेकिन महाराष्ट्र सरकार और मुम्बई पुलिस की बिहार पुलिस की जाँच को लेकर असहजता एवं असहयोग जगजाहिर है। साथ ही सुशांत के मामले में सबूतों को मिटाने और तथ्यों से छेड़छाड़ की खबरों ने हमारी चिंता बढ़ा दी है।

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