बिहार उत्तरप्रदेश मध्यप्रदेश उत्तराखंड झारखंड छत्तीसगढ़ राजस्थान पंजाब हरियाणा हिमाचल प्रदेश दिल्ली पश्चिम बंगाल

BREAKING NEWS

  • पीपुल्स फैंडली पुलिस की करतूत,  खाकी वाले ने पहले युवक को दौड़ाया, फिर कस कर की कुटाई, गाली गौलौज ऐसा की शर्म भी शरमा जाए
  • पीपुल्स फैंडली पुलिस की करतूत, खाकी वाले ने पहले युवक को दौड़ाया, फिर कस कर की कुटाई,

  • पटना में नियोजित शिक्षकों का बवाल, के.के पाठक का दिल्ली दौरा, शिक्षा मंत्री और सीएम के प्रधान सचिव का फोन नहीं उठा रहे ACS, जानिए क्या है पूरा मामला
  • पटना में नियोजित शिक्षकों का बवाल, के.के पाठक का दिल्ली दौरा, शिक्षा मंत्री और सीएम के प्रधान सचिव

  • पटना में आज नियोजित शिक्षक करेंगे आंदोलन, सक्षमता परीक्षा के पहले एडमिट कार्ड जला करेंगे विरोध
  • पटना में आज नियोजित शिक्षक करेंगे आंदोलन, सक्षमता परीक्षा के पहले एडमिट कार्ड जला करेंगे विरोध

  • मोतिहारी में एचएम और डीपीएम के बीच जमकर चलें लात घूंसे, वीडियो सोशल मीडिया में हुआ वायरल
  • मोतिहारी में एचएम और डीपीएम के बीच जमकर चलें लात घूंसे, वीडियो सोशल मीडिया में हुआ वायरल

  • बांका में अवैध खनन रोकने गए दारोगा और सिपाही पर बालू माफियाओं ने कुल्हाड़ी से किया, जब्त बालू लदे ट्रैक्टर लेकर हुए फरार
  • बांका में अवैध खनन रोकने गए दारोगा और सिपाही पर बालू माफियाओं ने कुल्हाड़ी से किया, जब्त बालू

  • गया में अनियंत्रित वाहन की चपेट में आने से सरकारी शिक्षक की हुई मौत, परिजनों में मचा कोहराम
  • गया में अनियंत्रित वाहन की चपेट में आने से सरकारी शिक्षक की हुई मौत, परिजनों में मचा कोहराम

  • पुण्यतिथि पर याद किए गए अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के भूतपूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि नंदन सहाय, रविशंकर प्रसाद और आरके सिन्हा ने दी श्रद्धांजलि
  • पुण्यतिथि पर याद किए गए अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के भूतपूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि नंदन सहाय, रविशंकर प्रसाद

  • खगड़िया में रंग लायी जदयू विधायक डॉ. संजीव की पहल, 9 करोड़ की लागत से 100 एकड़ जमीन होगा विकसित, उद्योग लगाने के लिए होंगे आवंटित
  • खगड़िया में रंग लायी जदयू विधायक डॉ. संजीव की पहल, 9 करोड़ की लागत से 100 एकड़ जमीन

  • सीएम योगी की कार के आगे चल रही एंटी डेमो गाड़ी पलटी, हादसे में पांच पुलिसकर्मी सहित नौ लोग बुरी तरह से चोटिल
  • सीएम योगी की कार के आगे चल रही एंटी डेमो गाड़ी पलटी, हादसे में पांच पुलिसकर्मी सहित नौ

  • हथुआ राज के महाराजा मृगेंद्र प्रताप शाही को मिली मानद डॉक्टरेट की उपाधि, थाईलैण्ड के प्रसिद्ध विश्वविद्यालय ने सामाजिक कार्यों के लिए किया सम्मानित
  • हथुआ राज के महाराजा मृगेंद्र प्रताप शाही को मिली मानद डॉक्टरेट की उपाधि, थाईलैण्ड के प्रसिद्ध विश्वविद्यालय ने

आपको पता है 22 मार्च को क्यों मनाया जाता है बिहार दिवस, क्या है इसकी ऐतिहासिक महत्ता और कैसे पटना का बदला स्वरूप

आपको पता है 22 मार्च को क्यों मनाया जाता है बिहार दिवस, क्या है इसकी ऐतिहासिक महत्ता और कैसे पटना का बदला स्वरूप

पटना. बिहार दिवस के रूप में मंगलवार को राज्य का 110वां स्थापना दिवस मनाया जा रहा है. लेकिन बिहार दिवस 22 मार्च को ही क्यों मनाया जाता है इसका इतिहास भी बेहद खास है. साथ ही मौजूदा पटना का स्वरूप भी बिहार की स्वतंत्र पहचान बनने के बाद ही अस्तित्व में आया. बिहार दिवस का यह स्वर्णिम अध्याय शुरू हुआ था 22 मार्च 1912 को. 

कई एतिहासिक कालखंड को समेटे बिहार का मौजूदा स्वरूप 22 मार्च 1912 को अस्तित्व में आया. उसके पूर्व तक बिहार ग्रेटर बंगाल का हिस्सा हुआ करता था. दरअसल बिहार को एक राज्य के रूप में ग्रेटर बंगाल से अलग कर स्वतंत्र पहचान देने की प्रक्रिया की शुरुआत 12 दिसंबर 1911 को शुरू हुई थी जब किंग जॉर्ज पंचम ने दिल्ली दरबार में बिहार को अलग करने के बारे में एक गुप्त निर्णय का खुलासा किया था. 

1912 से पहले  बिहार, ग्रेटर बंगाल के एक हिस्से के रूप में था. कलकत्ता में लेफ्टिनेंट सरकार और उनके सचिवालय द्वारा उस समय का बिहार शासित था, जो कि ग्रेटर बंगाल की प्रांतीय सरकार की सीट भी थी. व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए बिहार पर 3 संभागीय आयुक्तों और जिला कलेक्टरों द्वारा शासन और प्रबंधन किया जाता था. 

1912 से पहले बिहार की अपनी कोई राजधानी नहीं थी। प्रशासनिक मुख्यालय पटना के एक उपनगर बांकीपुर में हुआ करता था, जो 18 वीं शताब्दी के मध्य से ब्रिटिश और यूरोपीय लोगों द्वारा बसा हुआ था. तत्कालीन वायसराय लॉर्ड हार्डिंग ने भारत सरकार अधिनियम, 1912 के माध्यम से अपनी सीमाओं के साथ बिहार और उड़ीसा प्रांत के निर्माण के संबंध में अंतिम औपचारिक घोषणा की. यह घोषणा 22 मार्च, 1912 को की गई थी इसलिए 22 मार्च को बिहार दिवस मनाया जाता है. 


बिहार और उड़ीसा के पहले लेफ्टिनेंट-गवर्नर चार्ल्स स्टुअर्ट बेली ने 1 अप्रैल, 1912 (19 नवंबर, 1915 तक) को पदभार ग्रहण किया. उन्होंने पटना के छज्जूबाग में आयुक्त का आवास चुना, जिसे पहले दरभंगा राज से खरीदा गया था. बेली ने शासन के नए ढांचे को स्थापित करने के लिए 21 नवंबर, 1912 को बांकीपुर दरबार आयोजित करने का आह्वान किया. पांच आधिकारिक निकायों और सामाजिक संघों के प्रतिनिधि, पटना के प्राचीन इतिहास को याद करते हुए चाहते थे कि नई राजधानी प्राचीन गौरव को प्रतिबिंबित करे. 

पटना के नए राजधानी क्षेत्र के लिए चयनित साइट में आज का पटना चिड़ियाघर, पटना गोल्फ क्लब और पटना हवाई अड्डे तक बेली रोड, गार्डिनर रोड और हार्डिंग रोड से घिरा क्षेत्र शामिल है। सरकारी सचिवालय और अन्य कर्मचारियों के क्वार्टर गरदानीबाग में स्थित होने थे. 

1913 के अंत में, हार्डिंग ने गवर्नमेंट हाउस (राजभवन), वर्तमान पुराने सचिवालय और पटना उच्च न्यायालय के निर्माण की आधारशिला रखी. उन्होंने 3 फरवरी, 1916 को उनका उद्घाटन किया. उस समय पटना की प्रमुख सड़कों - बेली, हार्डिंग, सर्पेन्टाइन और गार्डिनर - का भी निर्माण किया गया. 

1 मार्च, 1916 से पटना उच्च न्यायालय द्वारा कार्य करना शुरू करने के बाद बिहार पर कलकत्ता उच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र समाप्त हो गया. वहीं पटना विश्वविद्यालय 1 अक्टूबर, 1917 को अस्तित्व में आया. उस समय, विश्वविद्यालय का अधिकार क्षेत्र बिहार, ओडिशा और नेपाल तक फैला हुआ था.