बिहार भवन से 'हाकिम' गये...लंबे समय से जमे 'बाबू' कब हटेंगे? दोनों की जोड़ी की थी चलती, भ्रष्टाचार में स्थानिक अभियंता हो चुके हैं सस्पेंड

बिहार भवन से 'हाकिम' गये...लंबे समय से जमे 'बाबू' कब हटेंगे? दोनों की जोड़ी की थी चलती, भ्रष्टाचार में स्थानिक अभियंता हो चुके हैं सस्पेंड

PATNA: बिहार के एक रिश्वतखोर इंजीनियर फिरोज आलम की खूब चलती थी। दिल्ली स्थित बिहार भवन-निवास में साम्राज्य स्थापित था। खुद तो लंबे समय से वहां पदस्थापित थे ही, अपने खास को भी लंबे समय से रखे हुए थे। ताकतवर इंजीनियर की चलती ऐसी थी कि क्लर्क भी अपने हिसाब से रखते थे. यानी उनकी मर्जी से ही बिहार भवन-निवास में सबकुछ होता था। हालांकि पहुंच और पैसा यूं ही रह गया। आर्थिक अपराध इकाई ने आय से अधिक संपत्ति केस में छापेमारी की। इसके बाद अब निलंबित कर दिये गये हैं. साहब तो गये अब उनके खास सहायक मधुसूदन जो तीन साल से अधिक समय से दिल्ली में काबिज हैं उनको कब हटाया जायेगा,यह सवाल उठने लगा है। 

बिहार भवन में हाकिम के साथ-साथ बाबू की भी थी चलती  

बिहार भवन के रेजिडेंट इंजीनियर फिरोज आलम के पास से 2 करोड़ 61 लाख 82 हजार रुपए की संपत्ति मिली थी. आर्थिक अपराध इकाई की छापेमारी में यह खुलासा हुआ था। आर्थिक अपराध इकाई की छापेमारी के बाद अब विभाग ने उस भ्रष्ट कार्यपालक अभियंता को निलंबित कर दिया है। भवन निर्माण विभाग के आदेश में कहा गया है कि आर्थिक अपराध इकाई के एसपी ने 8 अगस्त को इस संबंध में सूचना दी थी. बिहार भवन के स्थानिक अभियंता सह कार्यपालक अभियंता फिरोज आलम के खिलाफ दो करोड़ 61 लाख 82 हजार रू आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस दर्ज किया गया है. इस आलोक में आरोपी अभियंता को निलंबित किया गया है. निलंबन अवधि में भ्रष्ट इंजीनियर फिरोज आलम का मुख्यालय मुख्य अभियंता कार्यालय पटना निर्धारित किया गया है. साहब तो निलंबित हो गये उनके खास क्लर्क मधूसदन जो लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे हैं,उनका क्या होगा?  भवन निर्माण विभाग में किसी सहायक को तीन साल से अधिक समय तक एक जगह पर पदस्थापित नहीं रखना है। भवन निर्माण विभाग ने सभी क्लर्क की प्रतिनियुक्ति भी जून 2022 में ही खत्म कर दिया है। 

तीन साल से अधिक समय तक एक जगह नहीं रह सकते 

भवन निर्माण विभाग ने 22 जून 2022 को एक आदेश निकाला था, जिसमें कहा गया था कि कोई भी एक कर्मी 3 साल से अधिक किसी अंचल-प्रमंडल में पदस्थापित नहीं रहेंगे. 3 साल के बाद अधीक्षण अभियंता अपने क्षेत्र के वैसे कर्मियों का अनिवार्य रूप से स्थानांतरण करेंगे जिनका तीन साल का समय पूर्ण हो गया हो. साथ ही इसकी जानकारी विभाग को देंगे. किसी भी कर्मी की प्रतिनियुक्ति पदस्थापन से अलग जगह पर नहीं की जाएगी. यदि प्रशासनिक दृष्टिकोण से आवश्यक हो तो मुख्य अभियंता के माध्यम से प्रस्ताव विभाग को भेजें. इसके बाद अभियंता प्रमुख इसका अनुमोदन करेंगे. विभाग ने सभी प्रतिनियुक्ति को खत्म कर दिया है।

मंत्री और मुख्य सचिव से कंप्लेन 

स्थानिक अभियंता बिहार भवन फिरोज आलम और उनके खास रहे सहायक मधुसून के खिलाफ विभागीय मंत्री और मुख्य सचिव को कंप्लेन किया गया है. एक ठेकेदारकी तरफ से ही कंप्लेन दर्ज की गई है। जिसमें कहा गया है कि बिहार भवन में मुख्यमंत्री सूट के नाम पर लगभग 7लाख का फर्नीचर इंजीनियर फिरोज आलम ने अपने घर पर मंगवा लिया. यह भी आरोप लगाया गया है कि फिरोज आलम द्वारा 10 वर्षों में day2day चार करोड़ की सामान की आपूर्ति की गई. जिसमें 90 परसेंट समान बिहार भवन से गायब है. इसकी भी जांच कराई जाए. फिरोज आलम के द्वारा किए गए हर गलत भुगतान में उसके कर्मचारी मधुसूदन की संलिप्तता है. यहां तक की फिरोज आलम एमबी बुक पर बिल चढ़ाने के लिए जूनियर इंजीनियर से न करा कर खास क्लर्क मधुसूदन से एमबी पर बिल चढ़वाते थे। कंप्लेन में आगे लिखा गया है कि ठेकेदार से कमीशन का पैसा भी चेक से खुद हस्ताक्षर प्रति निकालते थे. जिसकी छाया प्रति संलग्न कर रहा हूं. कंप्लेन में यह भी आरोप लगाया गया है कि स्थानिक अभियंता फिरोज आलम ने पुष्पलता कंस्ट्रक्शन को डमी बनाकर लगभग 10 वर्षों से बिना काम कराए गलत ढंग से 3 करोड़ का भुगतान किया है .

धनकुबेर निकला इंजीनियर 

बता दें, भवन निर्माण विभाग के इंजीनियर फिरोज आलम ने खुद के और पत्नी के नाम पर नई दिल्ली के सुखदेव नगर में 1.30 करोड़ का एक फ्लैट खरीद रखा है। इस फ्लैट के रजिस्ट्री पर 6.50 लाख रुपए खर्च किए गए थे। EOU ने 8 अगस्त को फिरोज आलम के पटना समेत 5 ठिकानों पर छापेमारी की थी। दिल्ली में भ्रष्ट अफसर के ठिकानों पर छापेमारी में एक और ठिकाना के बारे में ईओयू को जानकारी लगी थी।इसके बाद जांच टीम झारखंड में भवन निर्माण विभाग के इंंजीनियर फिरोज आलम के भाई के यहां छापा मारा। इंजीनियर फिरोज आलम पर विभाग की हमेशा मेहरबानी रही है। ये लंबे समय से बिहार भवन-बिहार निवास दिल्ली में पदस्थापित रहे हैं. कई गंभीर आरोप लगने के बाद भी विभाग की कृपा बरसती रही। 

रेजिडेंट इंजीनियर पर काबिज थे फिरोज 

फिरोज आलम भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता सह रेसिडेंट इंजीनियर बिहार भवन के पद पर थे. इनकी पोस्टिंग नई दिल्ली स्थित बिहार भवन और बिहार सदन के लिए थी. EOU के अनुसार, फिरोज आलम ने अपनी पत्नी के नाम पर दिल्ली में ही नूर नगर एक्सटेंशन में भी एक फ्लैट खरीद रखा है। पटना में भी भाई के नाम पर समनपुरा में एक फ्लैट खरीदा है। खुद के नाम पर 7 लाख की तो पत्नी के नाम पर 8.20 लाख की कार इन्होंने ले रखी है। अपने भतीजे के नाम पर इन्होंने एक सियाज कार खरीद रखा है, जिसे रेंट पर ये बिहार निवास में ही चलवाते हैं। EOU के अनुसार, दिल्ली के जौहरी बाग में 2, शाहीन बाग में एक फ्लैट और मेरठ में जमीन खरीदने के भी सबूत मिले हैं। इसकी जांच चल रही है। दिल्ली में घर से 1.45 लाख रुपए कैश और लाखों रुपए की ज्वैलरी बरामद हुई है। इसके अलावा भतीजे के इलाज पर एक लाख रुपए खर्च करने के कागजात मिले हैं। साथ में फिरोज आलम की भाभी का सिग्नेचर किया हुआ। सादा कागज भी बरामद हुआ है। EOU का दावा है कि फिरोज आलम का एक और ठिकाना सामने आया है। 

फिरोज आलम मूल रूप से झारखंड के पलामू स्थित हरिहरगंज के रहने वाले हैं। 11 अप्रैल 1991 में बतौर जूनियर इंजीनियर इन्होंने अपनी सरकारी नौकरी की शुरुआत की थी। उस वक्त बिहार-झारखंड एक था। जब यह नौकरी में आए थे तब इनके पास सिर्फ पैतृक संपत्ति ही थी। मगर, अब करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं। इनकी पोस्टिंग दरभंगा और नालंदा जिले में बिहार शरीफ में रही। EOU की जांच में इनकी कुल संपत्ति आय से 91.08% अधिक पाई गई थी।

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