सूबे में कानून का राज बतानेवालों की खूली पोल, तीन साल में होनेवाली राजनीतिक हत्याओं के मामले में दूसरे स्थान पर है बिहार

सूबे में कानून का राज बतानेवालों की खूली पोल, तीन साल में होनेवाली राजनीतिक हत्याओं के मामले में दूसरे स्थान पर है बिहार

NEW DELHI / PATNA : बिहार की सरकार भले ही सूबे को अपराध मुक्त बताने से परहेज नहीं करती है, लेकिन यह दावे किस हद तक सही हैं, यह संसद में गृह मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट से पता चल जाता है। जिसके कारण पिछले तीन साल में जितनी राजनीतिक हत्याएं हुई हैं उनमें बिहार का स्थान दूसरा है। 

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में बताया कि 2017 से 2019 के बीच देश में कुल 213 लोगों की हत्या के पीछे राजनीतिक वजह थी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो राजनेताओं की हत्या का डेटा नहीं रखता है। लेकिन, 2017 से ही एनसीआरबी राजनीतिक कारणों से हुए हत्या के रिकॉर्ड रखने शुरू किए हैं। वह लोकसभा में सांसद भागीरथ चौधरी के सवालों का जवाब दे रहे थे।

उन्होंने कहा कि 2019 में इस मद के तहत 61 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 72 पीड़ित शामिल हैं। 2018 में राजनीतिक कारणों से हत्या के 54 मामले दर्ज किए गए और 59 लोगों की हत्या की गई। 2017 में 99 लोगों की हत्या के 98 मामले दर्ज किए गए थे। 2017 में झारखंड में राजनीतिक कारणों से सबसे अधिक 42 हत्याएं दर्ज की गईं, जो इस श्रेणी में देश भर में पीड़ितों का लगभग 43% हिस्सा थीं।

लिस्ट में दूसरे स्थान पर बिहार

बिहार में कानून का राज बतानेवाले राजनेताओं की पोल खोलनेवाली रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक राजनीतिक हत्याओं के मामले में बिहार दूसरा स्थान पर है। पिछले तीन साल में यहां 27 लोगों की राजनीतिक कारणों से हत्या की गई। वहीं लिस्ट में सबसे ऊपर झारखंड है, जहां 48 लोगों को अपनी जान राजनीतिक झगड़े के कारण गंवानी पड़ी है। तीसरे सथाना पर पश्चिम बंगाल है, जहां 24 हत्या के मामले दर्ज किए गए हैं। 

यह है आंकड़े

2017 में

झारखंड  - 42, बिहार – 12. कर्नाटक – 09, ओडिशा – 08, केरल – 05

2018 में

प.बंगाल – 12, बिहार – 09,  महाराष्ट्र – 07, कर्नाटक – 07, केरल – 04

2019 में

पं. बंगाल – 12, बिहार – 06, झारखंड – 06, आंध्र प्रदेश – 05, पंजाब, केरल, कर्नाटक - 04


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