राहुल गांधी का महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन करना स्मृति ईरानी को नहीं आया रास, बता दिया संसदीय परंपराओं का अपमान

राहुल गांधी का महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन करना स्मृति ईरानी को नहीं आया रास, बता दिया संसदीय परंपराओं का अपमान

DESK. राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने महंगाई और कई जरूरी खाद्य वस्तुओं को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाए जाने के विरोध में बुधवार को संसद भवन परिसर में धरना दिया। इन सांसदों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरना दिया। इन लोगों ने एक बैनर भी ले रखा था जिस पर गैस सिलेंडर की तस्वीर थी और लिखा था ‘‘दाम बढ़ने से आम नागरिकों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, वे कैसे जीवन यापन करेंगे?’’ कुछ सांसदों ने अपने हाथों में तख्तियां भी ले रखीं थीं।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के अलावा राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, तेलंगाना राष्ट्र समिति के नमा नागेश्वर राव एवं के. केशव राव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के हसनैन मसूदी, आईयूएमएल के ईटी मोहम्मद बशीर और कई अन्य विपक्षी सांसद इस धरने में शामिल हुए। विपक्षी सांसदों ने ‘दूध-दही पर जीएसटी वापस लो’ के नारे भी लगाए। इस मौके पर खड़गे ने कहा, ‘‘राहुल गांधी जी के नेतृत्व में कई दलों ने प्रदर्शन किया है। आज आटा, दही और कई अन्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ गई हैं। आम लोगों के ऊपर इस सरकार ने अत्यचार किया है। इसके खिलाफ हम विरोध करेंगे।’’

विपक्षी दलों ने मंगलवार को भी इसी विषय पर संसद परिसर में धरना दिया था और दोनों सदनों में हंगामा किया था जिस कारण कार्यवाही बाधित हुई थी। जीएसटी परिषद के फैसले लागू होने के बाद सोमवार से कई खाद्य वस्तुएं महंगी हो गईं। इनमें पहले से पैक और लेबल वाले खाद्य पदार्थ जैसे आटा, पनीर और दही शामिल हैं, जिन पर पांच प्रतिशत जीएसटी देना होगा।

इस बीच, कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन और लोकसभा एवं राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित होने पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी पर कटाक्ष किया। उन्होंने राहुल पर निशाना साधते हुए कहा, राहुल गांधी से BJP के कार्यकर्ता पूछ रहे हैं कि आपने अपने संसदीय इतिहास में लोकसभा में कितने निजी सदस्य विधेयक लाए। जिन्होंने अमेठी के सांसद होने के नाते एक प्रश्न न किया हो, जिन्होंने अमेठी छोड़कर वायनाड जाने के बाद 2019 के शीतकालीन सत्र में 40% की उपस्थिती रखी हो. जिनका पूरा राजनीतिक जीवन संसदीय परंपराओं का अपमान करते बीता हो। आज वे संसदीय कार्यवाही न हो इसके लिए अपने आप को समर्पित कर रहे हैं।


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