थारू जनजाति ने खोला अपना प्राइवेट बैंक, ग्रामीणों को कम ब्याज पर देते हैं कर्ज

थारू जनजाति ने खोला अपना प्राइवेट बैंक, ग्रामीणों को कम ब्याज पर देते हैं कर्ज

बहराइच. हिमाचल की तलहटी में स्थित कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के करीब बसे महाराणा प्रताप के वंशज कहलवाने वाली थारू जनजति स्वभाव से काफी भोली-भाली होती है, इनके इसी स्वभाव का फायदा उठाकर चालाक किस्म के लोग इन्हें ठगने का प्रयास करते रहते हैं. सबसे ज़्यादा महाजन जो इन्हें पैसे उधार देते हैं. वह इन्हें ठगते हैं, जिससे आजिज़ आकर अब इनलोंगो ने अपना प्राइवेट बैंक खोल लिया है. इसके जरिए यह अपने गांव वालों कम ब्याज पर धन उपलब्ध कराते हैं.

बहराइच जनपद के मिहीपुरवा विकास खण्ड के बिशुनापुर गांव में 47 ग्रामीणों ने मिलकर आदर्श स्वयं सहायता समूह नाम से एक संगठन बनाया है, जिसमें सभी सदस्यों के सहयोग से एक कोष का निर्माण किया गया है. पिछले 10 सालों में सदस्यों द्वारा दिए गए पैसे से इस समय इनके कोष में 12 लाख से अधिक रुपये जमा हो गए हैं. इन पैसों को एक प्रतिशत प्रति माह की दर से आवेदकों को धन उपलब्ध कराया जाता है.

समूह से धन लेने वाले व्यक्ति को स्वयं यह बताना होता है कि वह ब्याज सहित धन कितने दिनों में वापस कर देगा. यह व्यवस्था इसलिए कि गई है कि किसी को कोई परेशानी नहीं हो. समूह के अध्यक्ष और ग्राम के प्रधान बसन्त लाल ने बताया कि जब हम लोग महाजनों से पैसा लेते थे तो अधिक ब्याज देना पड़ता था. इसके कारण जल्दी मूल धन अदा ही नहीं हो पाता था. लेकिन अब हमारे गांव के लोग काफी खुश है क्योंकि उन्हें कम ब्याज पर पैसा भी मिल जाता है और महाजन भी उन्हें नहीं परेशान करते हैं. उन्होंने बताया कि अब हमारे गांव में बहुत कम महाजन आते हैं.


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