सात निश्चय की योजनाओं के नाम पर जमकर हुई धांधली, ग्रामीणों की शिकायत पर जांच का दिखावा कर अधिकारियों ने साध ली चुप्पी

सात निश्चय की योजनाओं के नाम पर जमकर हुई धांधली, ग्रामीणों की शिकायत पर जांच का दिखावा कर अधिकारियों ने साध ली चुप्पी

SUPAUL :  खबर प्रकाशित होने के बावजूद भी अधिकारी की नींद नही खुल रही है, सात निश्चय योजना के तहत सरकार ने गली नली पक्की करण योजना के तहत राज्य में बेहतर सड़कों के निर्माण के सरकारी दावे की ये तस्वीरें पोल खोल रही हैं। बिहार सरकार ने सड़कों के निर्माण और गुणवत्ता में बेहतरी का जिक्र कर अपनी पीठ थपा-थपाई थी लेकिन जिले के त्रिवेणीगंज प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत करहरवा पंचायत में इन चलने वाली योजना की पोल खोल दी है।

करहरवा वार्ड 6, 10, में सात निश्चय योजना में पूर्व मुखिया सदस्य व पंचायत सचिव की मिलीभगत योजना को पूर्ण दिखा कर राशि अवैध तरीके से निकाल लेने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। योजना में हुई गड़बड़ी की शिकायत के बाद भी पंचायती राज पदाधिकारी रुपेश कुमार राय की चुप्पी बड़े घपले की ओर इशारा कर रही है। अगर इसकी सत्यता की जांच हो तो इस योजना के तहत बहुत बड़ा खुलासा होने का उम्मीद है।

ग्रामीणों ने की जांच की मांग

मामले में ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है इस बीच योजना में गड़बड़ी की बात सामने आने पर ग्रामीण एकजुट होकर योजना के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग करते हुए इसकी जांच बीडीओ से की है। लोगों का कहना है कि अवैध निकासी की बात सामने आने पर आनन फानन में पूर्व मुखिया व सदस्य द्वारा जिन योजनाओं की राशि निकाल ली गई थी। उन योजनाओं पर काम शुरू कर दिया गया लेकिन बंदरबांट हो चुकी राशि के एवज में घटिया ईंट का प्रयोग बगैर मिट्टी भराई किये कार्य संपादित किया जा रहा है। जिससे ग्रामीण अधिक आक्रोशित है। 

गौरतलब है कि पूर्व मुखिया के कार्यकाल में योजना पारित होने के पश्चात वार्ड सदस्य ने पंचायत सचिव से मिलकर योजना मद की पूरी राशि निकाल ली। चुनाव पश्चात जीत कर आये नए सदस्य के सामने मामला आने पर मामले का खुलासा हो पाया। सबसे चौंकाने वाली बात यह कि राशि हेरफेर में शामिल तत्कालीन पंचायत सचिव सेवानिवृत्त हो चुके हैं। 

वर्ष 2019 में सात निश्चय योजना से वार्ड में दर्जनों योजनाएं शुरू की गई थी जिनमे अधिकांश योजनाएं मिट्टी भराई के साथ ईंट सोलिंग शामिल है। हालिया दिनों में सोशल ऑडिट के दरम्यान अधिकारी सभी पंचायतो में दौरा कर बारीकी से योजनाओं की जांच की गई ऐसे में जांच अधिकारी की संलिप्तता भी सामने आ रही है। 

सारी योजनाओं में गड़बड़ी

पूछे जाने पर पंचायती राज पदाधिकारी रूपेश राय बोलने से परहेज करते नजर आए सड़क निर्माण में लगाए जा रहे हैं ईट को हटाने की बात कह कर मोबाइल बंद कर दिया, इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं, इस तरह की पंचायती राज पदाधिकारी रुपेश कुमार राय के सहारे सरकार की चलने वाली इस विकास योजनाओं की मंशा पूरी हो पाएंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि निर्वाण निर्माण स्थल से एक भी ईंट नहीं हटाए गए है, सड़कों के निर्माण में बरती गई गड़बड़ी और भ्रष्टाचार साफ नजर आ रही है। वर्ष 2019 में पूर्ण होने वाली योजना को वर्ष 2022 में किया जा रहा है, इससे बड़ी सबूत क्या हो सकता है। फिलहाल घटिया सामग्री से हो रहे निर्माण से ग्रामीण नाराज है। उन्होंने एसडीओ एसजेड हसन से इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कारवाई की मांग की है। 

अधिकारियों की रिपोर्ट पर भरोसा

हैरत की बात यह है कि सरकार अधिकारियों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय कर लेती है सबकुछ ठीक-ठाक है लेकिन वास्तविकता कुछ और होती है। दरअसल भ्रष्टाचार और गड़बडिय़ों को अंजाम देने वाले अधिकारी सत्य को छुपा कर सचिव और मंत्रालय स्तर के अफसरों को भ्रामक और गलत जानकारियां उपलब्ध कराते हैं और जमीन हकीकत पर परदा डालकर अपने विधिविरुद्ध कार्यों को अंजाम देते रहते हैं। 

वास्तविक तथ्य सामने नहीं आने से किसी योजना में बरती जा रही कमियों से सरकार अवगत नहीं हो पाती और अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को ही अंतिम मान लेती है। 

जांच के नाम पर होती है खानापूर्ति

जो अधिकारियों- की मिलीभगत से भारी भ्रष्टाचार कर सरकारी धन का बंदरबाट किया जा रहा है। छुटभैये नेताओं के संरक्षण के चलते ग्रामीणों की शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं होती , कोई शिकायत उच्चाधिकारियों तक पहुंचती भी है तो जांच की खानापूर्ति कर शिकायतों को खारिज कर दिया जाता है।



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