JDU ने BJP अध्यक्ष से पूछा- जहरीली शराब से मौत पर आप 'पैसा' बांट रहे थे, आपका यह आचरण सही था? अपनी गिरेबां में झांकिये

JDU ने BJP अध्यक्ष से पूछा- जहरीली शराब से मौत पर आप 'पैसा' बांट रहे थे, आपका यह आचरण सही था? अपनी गिरेबां में झांकिये

पटना. जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह व उपेंद्र कुशवाहा पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल द्वारा की गयी टिप्पणी पर जदयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने संजय जायसवाल पर पलटवार किया है. उन्होंने संजय जायसवाल से आत्मचिंतन करने को कहा. साथ ही उन्होंने बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को उनके पुराने बयान को याद दिलाया.

अभिषेक झा ने बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए एक के बाद एक दो ट्वीट किया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय जयसवाल जी, आप आत्मचिंतन कीजिए और अपने गिरेबान में झांक कर देखिए कि बीते 1 वर्ष में आपने एनडीए गठबंधन के खिलाफ कितने बयान दिए हैं?' यदि स्मरण ना हो तो सभी बयानों का संकलन करके आपको भेजा जा सकता है.'

आगे अभिषेक झा ने ट्वीट कर कहा, 'शराबबंदी सरकार की नीति रही है लेकिन जहरीली शराब पीने से आपके लोकसभा क्षेत्र में जब कुछ लोगों की मृत्यु हुई थी, आप संवेदना व्यक्त करने और सांत्वना स्वरूप पैसे बांटने गए थे। एनडीए सरकार की नीति के हिसाब से आपका यह आचरण सही था या गलत?'

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह एवं उपेन्द्र कुशवाहा ने सम्राट अशोक को औरंगजेब से तुलना करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी. जेडीयू नेतृतृव ने नाटककार दया प्रकाश सिन्हा पर कार्रवाई करने एवं पद्मश्री वापस लेने की मांग की थी. इसके बाद बीजेपी ने जेडीयू नेताओं पर करारा प्रहार किया है. बीजेपी की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने मोर्चा संभाला और बिना नाम लिये ललन सिंह एवं उपेन्द्र कुशवाहा की जमकर खरी-खोटी सुनाई.

'जहरीली शराब से मौत पर पैसा बंटना सही'

संजय जायसवाल ने साधा निशाना

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने आज कहा कि  कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों के लिए नकारात्मक प्रचार भी मेवा देने वाला पेड़ है. पर मुझे आश्चर्य तब होता है जब कुछ समझदार राजनैतिक कार्यकर्ता भी इनके जाल में फंस कर अपना प्रचार में लग जाते हैं. वह यह भी नहीं सोचते कि इससे समाज को कितना नुकसान हो रहा है अगर इन्हें भरपेट मेवा न दिया जाए तो इन्हें उस पेड़ की जड़ में मट्ठा डालने से भी परहेज नहीं होता. यही वजह है कि बुद्धिजीवियों द्वारा इन्हें ‘राजनीतिक भस्मासुर’ की संज्ञा दी जाती है. बिहार में भी एनडीए सरकार की मजबूती और अनुशासन के कारण कुछ ‘ख़ास नेताओं’ को मनमुताबिक मेवा नहीं मिल रहा है. यही वजह है कि यह लोग किसी न किसी मुद्दे पर लगभग रोजाना ही अलग-अलग विषयों पर एनडीए को बदनाम करने के अपने एकसूत्री एजेंडे पर कार्यरत रहते हैं.

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