पटना का सरकारी अस्पताल बना तबेला: डिप्टी CM के मोहल्ले के सरकारी हॉस्पिटल में बंधती है 'गाय', है न सुशासन ?

पटना का सरकारी अस्पताल बना तबेला:  डिप्टी CM के मोहल्ले के सरकारी हॉस्पिटल में बंधती है 'गाय', है न सुशासन ?

PATNA: बिहार में कोरोना के इस संकट में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल पूरी तरह से खुल गई है। सुशासन पूरी तरह से नंगा हो गया है। इस संकट में सरकार की तरफ से जो दावे किये जा रहे थे उसकी हवा निकल गई है। जिला से लेकर प्रखंड और पंचायत तक के अस्पतालों के तबेला में परिणत होने की तस्वीर सामने आ चुकी है। अब तो सुदूर देहात की बात छोड़िए राजधानी पटना का सरकारी अस्पताल तबेला बन गया है। सरकार के नाक के नीचे के उस अस्पताल में आम लोगों का नहीं जानवरों का बसेरा है। सबसे आश्चर्य की बात तो यह कि तबेला बना अस्पताल जिस मोहल्ले में है उसी के अगल-बगल बिहार के डिप्टी सीएम का फ्लैट भी है।  

अस्पताल को सुदृढ बनाने के लिए हर साल बहाये जाते हैं पैसे

बिहार में अस्पतालों की व्यवस्था को सुदृढ़ करने के नाम पर हर साल करोड़ो-अरबों रुपए पानी की तरह बहाये जाते हैं। भवन निर्माण एवं संसाधन बढ़ाने के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा बहाया जाता है। दावा किया जाता है कि इन पैसों के खर्च होने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से पटरी पर आ जायेगी। लेकिन हकीकत तो कुछ और ही है। पैसा खर्च तो कर दिया जाता है लेकिन व्यवस्था सिर्फ कागजों पर ही सुदृढ़ होती है और मरीजों को  मंत्री-मुख्यमंत्री के भाषणों में इलाज हो जाता है। सूबे के बड़े अस्पतालों को छोड़ दें तो ग्रामीण इलाके या शहरी क्षेत्र के वार्ड में बने अस्पताल सुशासन राज में तबेला बन गए हैं, जहां आम मरीजों का इलाज नहीं बल्कि जानवरों का बसेरा होता है।

सरकार के नाक के नीचे अस्पताल बना तबेला

सुशासन राज में सुदूर देहात की बात छोड़िए,सरकार के नाक के नीचे राजधानी पटना में भी हालत खराब है। हम आपको उस मोहल्ले के एक अस्पताल की हकीकत से रूबरू कराते हैं जहां डिप्टी सीएम का फ्लैट है। पटना के रुकुनपुरा मोहल्ले में अवस्थित एक स्वास्थ्य केंद्र की तस्वीर देख आपके पास कोई शब्द नहीं बचेगा। आप समझ जाएंगे कि सरकार की तरफ से जो दावे किए जाते हैं उसमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं। अधिकारी और मंत्री जो बातें कहते हैं वो विश्वास के लायक नहीं। डिप्टी सीएम का मोहल्ला रुकुनपुरा जो दानापुर विस क्षेत्र में आता है वहाँ एक सरकारी अस्पताल है। वह अस्पताल आज तबेला बना है।वहां अब जानवरों और आवारा पशुओं का बसेरा है। यहां इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है,न कोई स्टाफ न डॉक्टर,खंडहर बना बिल्डिंग बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था का मुंह चिढ़ा रहा। सरकार की तरफ से दावे किये जाते हैं कि सभी अस्पतालों में मरीजों का इलाज किया जाता है लेकिन पटना का ही ये अस्पताल तबेला बना हुआ है। यहां सालों से स्वास्थ्यकर्मी के दर्शन नहीं हुए हैं। 

कई बार सरकार को जगाने की हुई कोशिश पर....

रूकनपुरा की वार्ड की पार्षद मधु चौरसिया का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र को नियमित रूप से चालू कराने को लेकर उन्होंने कई बार प्रयास किया। हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला लेकिन चालू नहीं हो सका। उन्होंने एक बार फिर से सरकार से मांग की है कि रुकनपुरा के इस प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र को जल्द चालू कराया जाये। वहीं इस संबंध में पटना के सिविल सर्जन के बात करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।  

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