बिहार के इस सरकारी अस्पताल में धक्का देने पर चलता है 'एम्बुलेंस', लाइट के बिना रात में चलता है शव वाहन

बिहार के इस सरकारी अस्पताल में धक्का देने पर चलता है 'एम्बुलेंस', लाइट के बिना रात में चलता है शव वाहन

AURANGABAD : औरंगाबाद में कहने को तो सदर अस्पताल मॉडल अस्प्ताल हो चुका है और इसकी उपलब्धियां सरकार के आंकड़ों में दर्ज भी है। यही कारण है कि यहां करोड़ो रूपये खर्च करके 300 बेड वाला 9 तल्ला ओपीडी,4 तल्ला मातृ शिशु वार्ड तथा आधुनिक किचन और लॉन्ड्री का निर्माण कार्य भी चल रहा है। लेकिन अस्प्ताल की व्यवस्था कैसी है। इसे धरातल पर आकर न सिर्फ देखा जा सकता है। बल्कि समझा जा सकता है। 

यहां के एम्बुलेंस को खुद आक्सीजन की जरूरत है। क्योंकि बिना पांच आदमी के धकेले यह आगे नही बढ़ पाती है। एम्बुलेंस के टायर भी घिस गए है। जिसको पंचर बना बनाकर चलाना मजबूरी हो गई है। ऐसी हालत में यहां का एम्बुलेंस लोगों की आकाँक्षाओं पर खरा नही उतरता है। शव वाहन भी अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है। शव वाहन में लगे स्ट्रेचर का हाल पूछिये मत। ये हम नही कह रहे। तस्वीरे बदहाली को बया कर रही है। उस पर शव वाहन के चालक का दर्द भी सुनाई दे रहा है। 

दिन हो तो इस पर लाद कर शव को कही भी पहुंचाया जा सकता है। लेकिन रात होते ही शव को गंतव्य स्थान तक पहुंचा ने में पसीने छूटने लगते है। क्योंकि एक तो उसकी स्थिति जर्जर है। दूसरी उसमे लाइट नही है। इस बारे में जब सिविल सर्जन से बात की गई तो उन्होंने एम्बुलेंस खराब होने की बात को स्वीकारते हुए कहा कि खराब हुए एम्बुलेंस को बनवा लिया गया है। साथ ही सदर अस्पताल में 9 एम्बुलेंस होने की जानकारी दी।

औरंगाबाद से धीरेन्द्र पाण्डेय की रिपोर्ट 

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