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बिहार सरकार की नई पहलः रैयतों को डिजिटाइज्ड अधिकार अभिलेख देने की तारीख तय

बिहार सरकार की नई पहलः रैयतों को डिजिटाइज्ड अधिकार अभिलेख देने की तारीख तय

PATNA: बिहार सरकार अब एक नई शुरूआत करने जा रही है। रैयतों को डिजिटाइज्ड अधिकार अभिलेख देने की तैयारी है।राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने तारीख तय कर दी है। 1 मार्च 2022 से बिहार के सभी 534 अंचलों से आमलोगों को डिजिटाइज्ड जमाबंदी की डिजिटली साइन्ड प्रति मिलने लगेगी।

 इसके पहले राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है। 3 फरवरी को अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री राम सूरत कुमार ने डिजिटाइज्ड अधिकार अभिलेख की सेवा शुरू नहीं होने पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने जल्द ही पूरे बिहार के रैयतों को यह सेवा उपलब्ध कराने का निदेश दिया था। पूर्व में भी डिजिटाइज्ड जमाबंदी आमलोगों को उपलब्ध कराने के प्रयास हुए लेकिन तैयारी पूरी नहीं होने की वजह से यह सेवा शुरू नहीं की जा सकी ।    

  बता दें, बिहार में कुल 3.77 करोड़ जमाबंदियां हैं, जिन्हें विषेष अभियान चलाकर डिजिटाइज्ड और ऑनलाइन कराया जा चुका है। इसके आधार पर ही पूरे बिहार में अक्टूबर, 2018 से ऑनलाइन म्यूटेशन शुरू किया गया था। किन्तु इस दौरान कई तरह की अशुद्धियां रह गई। जिन्हें शुद्ध किए बगैर इस पर आधारित सेवा को शुरू करना संभव नहीं था। जमाबंदी के डिजिटाइजेशन की अशुद्धि को ठीक करने के लिए परिमार्जन नाम का पोर्टल भी शुरू किया गया। जिन रैयतों ने अपने स्तर से आवेदन नहीं दिया है उनकी प्रविष्टि को ठीक करना संभव नहीं था। इस हेतु अभियान चलाकर प्रविष्टियों को दुरूस्त करने की कई बार कोशिश की गई। इसको लेकर राजस्व विभाग द्वारा बिहार के जिला पदाधिकारियों को कई बार पत्र लिखा गया। 

जमाबंदी पंजियों में कई प्रकार की इंट्री होती है, जिनमें गलती होने पर अधिकार अभिलेख गलत हो जाता है। गलतियों में कुछ इस प्रकार हैंः- जमाबंदी पंजी में लगान का विवरण दर्ज नहीं होना, पंजी में खाता-खेसरा और रकवा अंकित नहीं होना, नाम, पिता का नाम और पता गलत दर्ज होना ऐसे में लोगों द्वारा जमाबंदी पंजी की कॉपी मांगने पर गलत प्रति देने की आशंका थी। राजस्व अभिलेखों के आधुनिकीकरण और डिजिटाइजेशन करने की मुहिम के तहत डाटा इंट्री ऑपरेटरों द्वारा कई तरह की गलतियां अपने स्तर से भी कर दी गई थी। सरकार के निर्णय के मुताबिक डिजिटल जमाबंदी को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी अंचलों के राजस्व अधिकारी/अंचल निरीक्षक की होगी। जो भी दस्तावेज दिया जाएगा उसपर कर्मचारी, राजस्व अधिकारी और अंचल अधिकारी का दस्तखत होगा। जमाबंदी पंजी की हार्डकॉपी आधुनिक अभिलेखागारों में रखी जाएगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमाबंदी पंजी में अगर कोई सुधार किया गया तो किस तारीख को और किसके हस्ताक्षर से किया गया है।