पर सुशासन को शर्म नहीं आती! पटना का यह सरकारी स्कूल शिक्षा विभाग का कच्चा-चिट्ठा खोल रहा है, व्यवस्था देखकर आप लजा जाएंगे

पर सुशासन को शर्म नहीं आती! पटना का यह सरकारी स्कूल शिक्षा विभाग का कच्चा-चिट्ठा खोल रहा है, व्यवस्था देखकर आप लजा जाएंगे

PATNA : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी यह मांग करते हैं कि नई दिल्ली में जिस तरह की सरकारी स्कूल हैं, वैसे ही स्कूल अपने प्रदेश में होने चाहिए। लेकिन क्या यह संभव है। शायद नहीं। क्योकि बिहार के सरकारी स्कूलों को बेहतर करने के दावे तो सरकार बहुत करती है, लेकिन जब उनकी जमीनी हकीकत की पड़ताल की जाती है, तो सारे दावे पूरी तरह से फेल हो जाते हैं। यहां हम एक ऐसे ही सरकारी स्कूल के बारे में बता रहे हैं, जो प्रदेश की राजधानी पटना में स्थित है। उस शहर में जहां प्रदेश के तमाम मंत्री और अधिकारी रहते हैं। लेकिन इस सरकारी स्कूल की हालत यह है कि एक कमरे में कक्षा एक से आठ के छात्रा एक साथ पढ़ते हैं। वहीं इस स्कूल के टीचर इस डर से किसी से बात करने से डरते हैं कि अगर उन्होंने इसकी शिकायत कर दी तो कहीं उनकी नौकरी पर खतरा न आ जाए।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लड़कियों की शिक्षा को बेहतर करने के कई दावे करते हैं, यहां  राजधानी पटना की जिस स्कूल की बात हम कर रहे हैं, वह बांकिपुर के भंवर पोखर इलाके में अवस्थित राजकीय हिन्दी बालिका मध्य विद्यालय है। कक्षा आठवी तक संचालित इस स्कूल के भवन में सिर्फ तीन कमरे हैं। समझा जा सकता है कि आठ कक्षाओं के लिए यह बेहद कम है। लेकिन बस, यहीं पर नहीं होता है, क्योंकि तीन कमरों में एक की छत गिर चुकी है और अब वह बंद है। वहीं बचे दो कमरों में एक में एमडीएम का खाना बनता है और सिर्फ एक कमरे में सभी कक्षा के बच्चे एक साथ बैठकर पढ़ाई करते हैं। इस कमरे की हालत भी ऐसी है कि छत से पानी का रिसाव होता रहता है और दीवारों में दरार पड़ चुकी है।

छात्राओं के लिए नहीं है बाथरुम

सरकार कहती है कि छात्राओं के लिए हर स्कूल में बाथरुम का निर्माण किया गया है। लेकिन इस स्कूल के लिए ऐसा नहीं कहा जा सकता है क्योंकि यहां छात्राओं के लिए शौचालय उपलब्ध नहीं है। ऐसे में छात्राएं कैसे शौच के लिए जाती होंगी, यह समझा जा सकता है


बारिश में बंद हो जाता है स्कूल

यूं तो गर्मी के कारण अक्सर स्कूलों में छुट्टियां घोषित कर दी जाती है। लेकिन इस स्कूल में गर्मी के अलावा बारिश में भी छुट्टी कर दी जाती है। ऐसा इसलिए कि बारिश होने पर पूरे स्कूल परिसर और कमरे में पानी भर जाता है। कोई हादसा न हो, इसके लिए स्कूल बंद करना ही बेहतर माना जाता है। जो बच्चे यहां पढ़ने आते हैं, वह डरे हुए नजर आते हैं कि कहीं कोई हादसा न हो जाए।

रसोईया नहीं जानती कितने बच्चों का बनता है खाना

यहां मध्याह्न भोजनवाली महिला कुक से यह जानने की कोशिश की गई कि वह कितने बच्चों का खाना बनाती है तो उसने इस बारे में खुद को अंजान बताया। उसका कहना था कि जितने बच्चों का खाना बनाने का कहा जाता है, उतने बच्चों का वह खाना बना देती है।

नहीं बात करना चाहते शिक्षक

जब स्कूल के शिक्षक से जर्जर भवन और एक कमरे में आठ क्लास संचालित करने को लेकर न्यूज4नेशन ने बात करने की कोशिश की तो वह कैमरे से बचती हुई नजर आई। शायद उन्हें इस  बात  का डर था कि पटना में होने के कारण अगर वह किसी प्रकार की बात करती हैं तो नौकरी पर किसी प्रकार का खतरा न आ जाए।

बहरहाल, जब राज्य सरकार के दावे राजधानी पटना में ही फेल होते हुए नजर आ रहे हैं तो प्रदेश के दूसरे सरकारी स्कूलों में कैसी हालत होगी, यह बताने की जरुरत नहीं है। 


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